Jagaddhatri Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi: देवी जगद्धात्री की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है. देवी जगद्धात्री के नाम का अर्थ है जगत की धारिणी, यानी जो जगत का पालन करती हैं. ऐसा माना जाता है कि, मां जगद्धात्री ब्रह्मांड का पोषण करती हैं. इन्हें शक्ति, धैर्य और नियंत्रण की देवी माना जाता है. आपको मां जगद्धात्री को प्रसन्न करने के लिए उनकी आरती करनी चाहिए.
मां जगद्धात्री देवी आरती (Jagaddhatri Mata Devi Ki Aarti Lyrics in Hindi)
जय जय जगद्धात्री माता, जय जय अम्बे भवानी।
सिंहवाहिनी सुरसुन्दरी, जय जय जगदाधारिणी॥
चन्द्रमौलीं कमलविलासिनी, चारु त्रिनयनी कल्याणी।
सिंहवाहिनी सुरसुन्दरी, जय जय जगदाधारिणी…॥
सप्तशतीमन्त्रपूजिता, भक्तजनरक्षिणी भवभयहारिणी।
सिंहवाहिनी सुरसुन्दरी, जय जय जगदाधारिणी…॥
सुरनरमुनिजन वन्दित, करुणामयी दयासिन्धु भवानी।
सिंहवाहिनी सुरसुन्दरी, जय जय जगदाधारिणी…॥
सकल सिद्धिदायिनी माता, भवदुःखविनाशिनी जगदम्बे।
भक्तजनार्तिनिवारिणी, जय जय जगदाधारिणी…॥
दीनदयालु हरिणी रूपा, दुःखहरिणी कृपालु माया।
लोकशरण कमलनयनी, जय जय जगदाधारिणी॥
त्रिकालज्ञा त्रिपुरविनाशिनी, जगन्नाथार्चित सदा भवानी।
शरणागतपरमवारिणी, सर्वमंगलकारिणी॥
भवसागर से तारो माता, भक्तों की नैया पार लगाओ।
जय जय करुणामयी अम्बे, सबका जीवन सफल बनाओ॥
विश्वमंगल की जोत जलाओ, प्रेमभक्ति का भाव बढ़ाओ।
जगद्धात्री जगत जननी तू, सबमें शान्ति प्रकाश फैलाओ॥
मां का नाम जगद्धात्री क्यों पड़ा? (Jagaddhatri Mata History)
जगद्धात्री माता को ‘जगत की धारक’ माना जाता है. जगद्धात्री नाम का अर्थ जगत की धारणी होता है. जो पूरे ब्रह्मांड का पालन करती हैं. इसी वजह से मां का नाम जगद्धात्री पड़ा.
मां जगद्धात्री देवी की कैसे करें पूजा (Jagaddhatri Mata Puja Vidhi)
मां जगद्धात्री की पूजा की शुरुआत 18वीं शताब्दी में पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के कृष्णनगर से मानी जाती है. राजा कृष्णचंद्र राय ने किसी कारण से दुर्गा मां की पूजा न कर पाने पर मां जगद्धात्री की पूजा की थी. माता की पूजा के लिए सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लेंं और साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं. कलश और देवी की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें आरती करें.
मां जगद्धात्री देवी का प्रिय रंग (Jagaddhatri Mata Ka Priya Rang)
माता मां जगद्धात्री देवी मंत्र (Jagaddhatri Mata Mantra)
तीर्थ यज्ञ तपो दान योगसारे जगन्मयी।
त्वमेव सर्वं सर्व्वस्थे जगद्धात्री नमोस्तुते।
अगम्य धाम धामस्थे महायोगीशहृतपुरे।
अमेयभावकुटस्थे जगद्धात्री नमोस्तुते।
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