Whiskey War: वो अनोखी जंग जहां बम नहीं, शराब की बोतलें चलती थीं; 38 साल बाद ऐसे हुआ अंत
दुनिया का सबसे अजीब युद्ध, जहां सेनाएं सरहद पर गोलियां नहीं, व्हिस्की की बोतलें छोड़ती थीं। 38 साल तक चले कनाडा और डेनमार्क के इस Whiskey War ने दुनिया को सिखाया कि शांति से भी सरहदों के फैसले हो सकते हैं। पढ़िए हंस आइलैंड की ये दिलचस्प कहानी

जहां एक ओर दुनिया युद्ध की विभीषण झेल रही है, वहीं इतिहास के पन्नों में एक ऐसा भी युद्ध दर्ज है जो बंदूकों से नहीं, बल्कि शराब की बोतलों से लड़ा गया। इसे दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण और चटपटा युद्ध कहा जाता है।
व्हिस्की वॉर: गोला-बारूद नहीं, शराब की बोतलों से 38 साल तक लड़ा गया युद्ध
2 / 6आज जब दुनिया युद्धों की तबाही देख रही है, तब कनाडा और डेनमार्क के बीच हुए व्हिस्की वॉर (Whiskey War) की कहानी मिसाल पेश करती है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा युद्ध था जहाँ सेनाएं एक-दूसरे पर गोलियां नहीं, बल्कि व्हिस्की की बोतलें बरसाती थीं।
हंस आइलैंड (Hans Island): वो चट्टान जिस पर था सारा झगड़ा
3 / 6यह कहानी शुरू होती है हंस आइलैंड से, जो कनाडा और डेनमार्क (ग्रीनलैंड) के बीच स्थित मात्र 1.3 वर्ग किमी का एक छोटा सा पथरीला द्वीप है। दोनों देश इस पर अपना हक जताते थे क्योंकि यह दोनों की सीमाओं से बिल्कुल बराबर दूरी पर स्थित था।
1984 में शुरू हुआ व्हिस्की का खेल
4 / 6युद्ध की शुरुआत तब हुई जब 1984 में कनाडाई सैनिकों ने द्वीप पर अपना झंडा फहराया और वहां कनाडियन क्लब व्हिस्की की एक बोतल छोड़ दी। साथ ही एक बोर्ड लगाया जिस पर लिखा था- कनाडा में आपका स्वागत है।
डेनमार्क का करारा जवाब: वेलकम टू डेनमार्क
5 / 6डेनमार्क ने इसका जवाब बड़े दिलचस्प अंदाज में दिया। उनके मंत्री द्वीप पर पहुंचे, कनाडा का झंडा हटाया, डेनमार्क का झंडा लगाया और वहां 'डैनिश श्नॉप्स' (एक स्थानीय शराब) की बोतल रख दी। उन्होंने एक नोट भी छोड़ा- डेनमार्क के द्वीप पर आपका स्वागत है।
38 साल तक चलता रहा यह सिलसिला
6 / 61984 से लेकर 2022 तक यह सिलसिला चलता रहा। जब भी एक देश के सैनिक वहां जाते, दूसरे देश की शराब पी जाते, अपना झंडा लगाते और अपनी शराब की बोतल वहां छोड़ आते। न कोई खून बहा, न कोई हिंसा हुई; बस सालों तक यह शराब युद्ध चलता रहा।