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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच इराक एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है, जहां वह ईरान और अमेरिका दोनों तरफ से हो रहे हमलों का शिकार बन रहा है. 28 फरवरी के बाद से इस पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है और इराक धीरे-धीरे इस महायुद्ध के सबसे बड़े संकट के केंद्र में समाता जा रहा है.
अमेरिकी ठिकानों और एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले

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युद्ध शुरू होने के बाद से बगदाद और इरबिल जैसे शहरों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूतावासों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. राजधानी के एयरपोर्ट के पास ड्रोन और मिसाइल हमलों ने आम नागरिकों के बीच भारी खौफ पैदा कर दिया है.
जवाबी कार्रवाई में अमेरिका का हवाई प्रहार

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हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अमेरिकी सेना ने इराक के भीतर मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर बमबारी तेज कर दी है. जुरफ अल-सखर और अल-काइम जैसे इलाकों में हुए इन हवाई हमलों ने इराक की संप्रभुता और सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है.
तेल निर्यात ठप होने से आर्थिक तबाही

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खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण इराक का तेल निर्यात लगभग रुक गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. हालात इतने खराब हैं कि सरकार के पास अगले महीने से अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसे कम पड़ सकते हैं.
कुर्द पाइपलाइन और तुर्की के जरिए समाधान की कोशिश

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वित्तीय संकट से बचने के लिए बगदाद सरकार तुर्की के जेहान बंदरगाह तक जाने वाली पाइपलाइन को फिर से शुरू करने की कोशिश में जुटी है. सरकार चाहती है कि किर्कुक के तेल क्षेत्रों से रोजाना कम से कम ढाई लाख बैरल तेल निर्यात हो, लेकिन राजनीतिक खींचतान जारी है.
कमजोर अंतरिम सरकार और बढ़ती अस्थिरता

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इराक में फिलहाल एक कार्यवाहक सरकार है, जिसके पास मिलिशिया समूहों और विदेशी दखल को नियंत्रित करने की सीमित शक्तियां हैं. अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती हिंसा इराक को सालों पीछे धकेल सकती है.