ईरान के नए हथियार का नहीं है कोई तोड़! अमेरिका और इजरायल के ड्रोन ऑपरेशन के लिए बनेगा बड़ा खतरा

Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने ऐसी सैन्य तकनीक और रणनीति विकसित की है जो अमेरिका और इजरायल के ड्रोन ऑपरेशन को चुनौती दे सकती है. सस्ते लेकिन प्रभावी ड्रोन, ड्रोन स्वार्म रणनीति और एंटी-ड्रोन तकनीक के जरिए ईरान आधुनिक युद्ध के तरीके को बदलने की कोशिश कर रहा है.

Iran 359 Drone
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Credit: AI

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ईरान का नया हथियार बना वैश्विक चर्चा का विषय

ईरान का नया हथियार बना वैश्विक चर्चा का विषय2 / 9

ईरान की नई सैन्य तकनीक और हथियारों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. पिछले कुछ सालों में ईरान ने अपने ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम को काफी मजबूत किया है. ईरान ने '359' नाम की नई लॉयटरिंग सरफेस-टू-एयर मिसाइल पेश की है. 359 अपग्रेडेड और बड़ा वर्जन है. इस मिसाइल को दुश्मन को ढूंढने के लिए रडार की भी जरूरत नहीं पड़ती. पिछले 11 दिनों में '358' ने कई अमेरिकी MQ-9 रीपर और इजरायली हर्मीस 900 ड्रोन को निशाना बनाया है. अब '359' के आने से अमेरिका के मिडिल ईस्ट में सभी ड्रोन खतरे में पड़ गए हैं. '359' का एयरफ्रेम बड़ा है, ये ज्यादा वक्त तक आसमान में रह सकता है. इसकी टर्मिनल स्पीड ज्यादा है, जो दुश्मन को आसानी से निशाना बना सकती है. यह भी रडार-साइलेंट है और ऑटोनॉमस हंटिंग करता है.

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आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका

आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका3 / 9

आज के समय में ड्रोन युद्ध का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं. अमेरिका और इजरायल लंबे समय से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमले करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करते रहे हैं. इन ड्रोन की मदद से बिना सैनिकों को खतरे में डाले दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया जा सकता है. लेकिन अब ईरान ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे इन ड्रोन को निशाना बनाया जा सके या उनके मिशन को फेल किया जा सके.

सस्ते लेकिन खतरनाक ड्रोन पर ईरान का फोकस

सस्ते लेकिन खतरनाक ड्रोन पर ईरान का फोकस4 / 9

ईरान की सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कम लागत वाले लेकिन असरदार ड्रोन बनाना है. ये ड्रोन आकार में छोटे होते हैं और कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे इन्हें रडार से पकड़ना मुश्किल हो जाता है. कम कीमत होने की वजह से इन्हें बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे दुश्मन की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है.

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शाहेद-136 ड्रोन बना बड़ा हथियार

शाहेद-136 ड्रोन बना बड़ा हथियार5 / 9

ईरान का ‘शाहेद-136’ ड्रोन दुनिया के सबसे चर्चित स्विचब्लेड ड्रोन में से एक माना जाता है. ये ड्रोन अपने लक्ष्य पर जाकर सीधे टकराता है और विस्फोट करता है. इसकी खासियत ये है कि इसे लंबी दूरी से लॉन्च किया जा सकता है और ये कई किलोमीटर दूर तक उड़ान भर सकता है. इसी वजह से ये दुश्मन के लिए गंभीर खतरा बन जाता है.

ड्रोन स्वार्म रणनीति से बढ़ती चुनौती

ड्रोन स्वार्म रणनीति से बढ़ती चुनौती6 / 9

ईरान ने ड्रोन स्वार्म यानी एक साथ कई ड्रोन भेजने की रणनीति भी विकसित की है. जब एक ही समय में दर्जनों ड्रोन किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं तो एयर डिफेंस सिस्टम के लिए सभी को रोकना मुश्किल हो जाता है. इससे दुश्मन की रक्षा प्रणाली पर भारी दबाव पड़ता है और किसी एक ड्रोन के लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है.

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महंगे हथियारों से सस्ते ड्रोन का मुकाबला

महंगे हथियारों से सस्ते ड्रोन का मुकाबला7 / 9

ईरान के सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को महंगे मिसाइल इंटरसेप्टर का इस्तेमाल करना पड़ता है. कई सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ये असंतुलन ईरान की रणनीति का हिस्सा है. कम लागत वाले ड्रोन के जरिए महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को व्यस्त रखना और आर्थिक दबाव बनाना भी इस रणनीति का मकसद हो सकता है.

मिडिल ईस्ट में बदल रहा युद्ध का स्वरूप

मिडिल ईस्ट में बदल रहा युद्ध का स्वरूप8 / 9

पिछले कुछ सालों में मिडिल ईस्ट के संघर्षों में ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक की भूमिका काफी बढ़ गई है. पारंपरिक युद्ध की जगह अब तकनीकी और दूर से नियंत्रित हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ईरान भी इसी दिशा में अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है.

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भविष्य के युद्ध में बढ़ेगी ड्रोन तकनीक की भूमिका

भविष्य के युद्ध में बढ़ेगी ड्रोन तकनीक की भूमिका9 / 9

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम युद्ध का अहम हिस्सा बन जाएंगे. ईरान की नई तकनीक और रणनीति इस बात का संकेत देती है कि भविष्य में युद्ध का स्वरूप और भी ज्यादा तकनीकी और ऑटोमेटिक हो सकता है. यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब ड्रोन तकनीक और रक्षा प्रणालियों पर तेजी से निवेश कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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