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ईरान की न्यायपालिका ने गुरुवार को घोषणा की कि जनवरी महीने के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार तीन पुरुषों को फांसी की सजा दी गई है. यह पहली ज्ञात सजाएं हैं जो प्रदर्शनकारियों पर अमल में लाई गईं.
ईरानी शासन की कठोरता

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ईरान की आधिकारिक मिजान न्यूज एजेंसी ने फांसी की पुष्टि की, जो आमतौर पर वहां लटकाकर दी जाती है. अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनावपूर्ण युद्ध के बीच यह कदम ईरानी शासन की कठोरता को दर्शाता है.
किन 3 लोगों को मिली फांसी?

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मिजान एजेंसी के अनुसार, महदी गासेमी, सालेह मोहम्मदी और सईद दव्वोदी नामक तीनों को कोंग के पास फांसी दी गई. इनमें से एक 19 वर्षीय पहलवान सईद दव्वोदी था, जो युवा उम्र के बावजूद सजा का शिकार हुआ. ईरानी न्यायालय ने इन्हें प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमले का दोषी ठहराया.
पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप

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न्यायालय का दावा है कि तीनों ने तेहरान से 130 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कोंग शहर में दो पुलिसकर्मियों को चाकू मारकर हत्या कर दी थी. यह घटना जनवरी के हिंसक प्रदर्शनों के दौरान घटी, जब देशभर में आंदोलनकारी सड़कों पर उतर आए थे. ईरान ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए व्यापक बल प्रयोग किया.
विरोध को कुचलने की कोशिश

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ईरानी शासन ने विरोध को कुचलने में असाधारण क्रूरता दिखाई, जिसमें सुरक्षाबलों ने हजारों प्रदर्शनकारियों को मार डाला. दसियों हजार लोगों को हिरासत में लिया गया और कई पर राजद्रोह के आरोप लगे. न्यायपालिका ने पहले से ही फांसी की धमकी दे रखी थी. कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी थी कि हिरासत में लिए गए लोगों पर सामूहिक फांसी का खतरा मंडरा रहा है.
मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप

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मानवाधिकार अभियानकारियों का लंबे समय से आरोप है कि ईरान हिरासत में लिए गए लोगों से जबरन कबूलनामा लेता है. अदालत में पूर्ण बचाव का अवसर नहीं दिया जाता. तीनों दोषियों को निष्पक्ष सुनवाई से वंचित रखा गया. यह प्रथा ईरान की न्याय व्यवस्था पर वैश्विक सवाल खड़े करती है.
अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान का युद्ध

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अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान का युद्ध 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसके बीच यह फांसी सत्ता के दमन का संदेश देती है. आंतरिक अस्थिरता को काबू करने की कोशिश दिखाई दे रही है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसकी निंदा शुरू कर दी है.
और भी हो सकती हैं फांसी

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जानकारों ने आगाह किया कि यह फांसीयों की शुरुआत मात्र हो सकती है. प्रदर्शनकारियों पर व्यापक सजाओं का सिलसिला चल सकता है. वैश्विक दबाव बढ़ने की संभावना है. ईरान की आक्रामक नीति पर असर पड़ सकता है.