
1 / 8
सोशल मीडिया पर मांसाहार कम करने की मुहिम तेज हो रही है, स्वास्थ्य, पर्यावरण और पशु कल्याण के नाम पर लोग वेगनरी अपनाने या मीट-फ्री मंडे का समर्थन कर रहे हैं. ब्रिटेन में एक तिहाई नागरिकों ने मांस कम किया है, अमेरिका में दो तिहाई दावा करते हैं कि वे पहले से कम खा रहे.

2 / 8
डॉक्यूमेंट्री और अभियान इन बदलावों को बढ़ावा दे रहे, लेकिन वैश्विक आंकड़े उलट तस्वीर पेश करते हैं. पिछले 50 वर्षों में मांस उत्पादन पांच गुना बढ़कर 330 मिलियन टन हो गया, जो 1960 के 70 मिलियन टन से कहीं अधिक है. आबादी दोगुनी से ज्यादा हो गई, लेकिन बढ़ती आय ने खपत को और प्रोत्साहित किया.

3 / 8
प्रति व्यक्ति खपत के लिहाज से न्यूजीलैंड और अर्जेंटीना शीर्ष पर हैं, जहां सालाना 100 किलो से अधिक मांस ग्रहण किया जाता है. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया कुल खपत में आगे, जबकि पश्चिमी यूरोप के देशों में 80-90 किलो प्रति व्यक्ति.

4 / 8
वहीं, इसके उलट गरीब देशों में आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. गरीब देश में मांसाहार खपत बहुत कम है. इथियोपिया में 7 किलो, रवांडा-नाइजीरिया में 8-9 किलो, जो यूरोपीय औसत का दसवां हिस्सा है. मध्यम आय वाले देश जैसे चीन और ब्राजील ने खपत दोगुनी की- चीन में 1960 के 5 किलो से बढ़कर 60 किलो, ब्राजील में 1990 से दोगुना. कीनिया जैसे देशों में स्थिरता रही.

5 / 8
भारत अपवाद स्वरूप उभरता है. 1990 के बाद आय तिगुनी होने के बावजूद सालाना प्रति व्यक्ति मांस खपत मात्र 4 किलो बनी हुई, जो वैश्विक न्यूनतम है. राष्ट्रीय सर्वे बताते हैं कि दो तिहाई भारतीय किसी न किसी मांसाहारी हैं, फिर भी सांस्कृतिक-धार्मिक कारणों से कुल खपत सीमित.

6 / 8
पश्चिमी देशों में 'मांस कम कर रहे' दावों के बावजूद अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़े बढ़ती खपत दिखाते हैं. यूरोपीय संघ में भी यही स्थिति, हालांकि रेड मीट-बीफ-पोर्क से पोल्ट्री की ओर रुझान है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहतर.

7 / 8
मांसाहार के फायदे-नुकसान दोनों हैं. कम आय देशों में यह पोषण सुधारता है, लेकिन अधिकता हृदय रोग, कैंसर जोखिम बढ़ाती. अध्ययन रेड-प्रोसेस्ड मीट को खतरनाक बताते.

8 / 8
पर्यावरणीय प्रभाव में गाय का चारा तीन-दस गुना अधिक संसाधन लेता, चिकन से दोगुना. सुअर भी दो गुना प्रभाव डालते. बदलाव जरूरी- मात्रा कम, प्रकार चुनिंदा, विलासिता का दर्जा बहाल. वैश्विक समृद्धि के साथ खपत बढ़ेगी, लेकिन स्थायी विकल्प अपनाने होंगे.