UP में है मौसम की भविष्यवाणी करने वाला मंदिर, बता देता है कब आएगा मानसून, जानें कैसे?

भारत के एक मंदिर को 'मानसून मंदिर' के नाम से पूरी दुनिया जानती है, जहां गर्भगृह की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें मानसून के आगमन की सटीक भविष्यवाणी करती मानी जाती हैं. आधुनिक मौसम विज्ञान के हाईटेक उपकरणों के इस दौर में भी यह प्राचीन मंदिर सदियों से किसानों और ग्रामीणों का भरोसा बना हुआ है.

temple in UP
1 / 7

भारत के एक मंदिर को 'मानसून मंदिर' के नाम से पूरी दुनिया जानती है, जहां गर्भगृह की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें मानसून के आगमन की सटीक भविष्यवाणी करती मानी जाती हैं. आधुनिक मौसम विज्ञान के हाईटेक उपकरणों के इस दौर में भी यह प्राचीन मंदिर सदियों से किसानों और ग्रामीणों का भरोसा बना हुआ है.

विज्ञापन

कहां है ये मंदिर?

कहां है ये मंदिर?2 / 7

यह मंदिर कानपुर के भीतरगांव ब्लॉक के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित है और भगवान जगन्नाथ को समर्पित है. इतिहासकारों के अनुसार इसका अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के काल में हुआ था, जबकि कुछ पुरातत्वविद् इसे सम्राट अशोक के काल का भी मानते हैं. मंदिर की बनावट बौद्ध स्तूप जैसी है और इसमें काले पत्थर की प्राचीन मूर्तियां भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र स्थापित हैं.

विज्ञापन

मंदिर के अंदर बदल जाता है तापमान

मंदिर के अंदर बदल जाता है तापमान3 / 7

मंदिर की दीवारें बहुत मोटी हैं और इन्हें बनाने में विशेष प्रकार के पत्थरों और ईंटों का उपयोग किया गया है. इस वास्तुकला में ऐसा संतुलन है जो आर्द्रता और तापमान के परिवर्तन को अवशोषित करने की क्षमता रखता प्रतीत होता है. मंदिर का ढांचा इतना मजबूत है कि यह सदियों तक बिना बड़े क्षति के टिका रहा है.

कैसे करता है मानसून की भविष्यवाणी?

कैसे करता है मानसून की भविष्यवाणी?4 / 7

जून की चिलचिलाती धूप और उमस वाले महीने में गर्भगृह की छत वाले पत्थर से अचानक पानी की बूंदें टपकने लगती हैं. यदि बूंदें बड़ी और तेजी से गिरती हैं तो इसे भारी वर्षा का संकेत माना जाता है, जबकि छोटी बूंदें सूखे की आशंका दर्शाती हैं. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जैसे ही आसमान में बादल छाते हैं और असली बारिश शुरू होती है, छत से पानी टपकना तुरंत बंद हो जाता है.

विज्ञापन

स्थानीय लोगों का भरोसा

स्थानीय लोगों का भरोसा5 / 7

सदियों से स्थानीय किसान और ग्रामीण लोग फसल बुवाई और कृषि कार्यों की तैयारी के लिए इस मंदिर की भविष्यवाणी पर भरोसा करते आए हैं. इस मंदिर के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि लोग आधुनिक मौसम विज्ञान की भविष्यवाणियों के साथ-साथ इस पर विशेष विश्वास रखते हैं. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब तक यह मंदिर बूंदें गिरा रहा है, तब तक बारिश नहीं होती, और बूंदें बंद होते ही बारिश शुरू हो जाती है.

वैज्ञानिकों के लिए अनसुलझी पहेली

वैज्ञानिकों के लिए अनसुलझी पहेली6 / 7

पुरातत्व विभाग और कई वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए बार-बार शोध किए और मंदिर के आसपास खुदाई भी की. उन्होंने पाया कि छत पर कोई रिसाव या बाहरी जल स्रोत नहीं है, फिर भी केवल मानसून आने से ठीक 7 से 15 दिन पहले पानी टपकना शुरू हो जाता है. आज तक कोई भी वैज्ञानिक इस अद्भुत घटना का स्पष्टीकरण नहीं दे पाया है, जिससे यह एक अनसुलझी गुत्थी बनी हुई है.

विज्ञापन

विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम

विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम7 / 7

यह मंदिर विज्ञान, आस्था और रहस्य का एक अद्वितीय संगम है जहां आधुनिक तकनीक के रहते भी प्राचीन मान्यताएं जीवित हैं. ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि प्राचीन वास्तुकला और निर्माण विधियों में कुछ ऐसे गुप्त सिद्धांत हो सकते हैं जो आज के विज्ञान को भी चुनौती देते हैं.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन