सनराइजर्स ने पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को क्यों खरीदा? टीम के कोच ने बता दी बड़ी वजह
Why Sunrisers Leeds Signs Abrar Ahmed: सनराइजर्स लीड्स के 'द हंड्रेड 2026' ऑक्शन में पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को साइन करने के फैसले ने भारतीय क्रिकेट जगत में पहले ही एक बहस छेड़ दी थी. कई भारतीयों को ये बात परेशान करने वाली लगी कि एक भारतीय मालिक ने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को चुना है; ये एक ऐसी बात है जो भारत के दुनिया भर में इतने बड़े असर के बावजूद बहुत कम देखने को मिलती है.

सन ग्रुप के मालिकाना हक वाली इस फ्रेंचाइजी ने, जो आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद को भी चलाती है, इस मिस्ट्री स्पिनर को पाने के लिए पूरी जोर लगाया और लंदन में 'ट्रेंट रॉकेट्स' के साथ थोड़ी देर चली बोली की जंग के बाद उन्हें 190,000 पाउंड (तकरीबन 2.3 करोड़ रुपये) में अपने साथ जोड़ लिया.
2 / 6ये साइनिंग इस ऑक्शन की सबसे बड़ी चर्चा का विषय रही है. इसने अबरार को पहला ऐसा पाकिस्तानी इंटरनेशनल खिलाड़ी बना दिया जिसे किसी भारतीय मालिकाना हक वाली 'द हंड्रेड' फ्रेंचाइजी ने चुना हो; ऐसा पहले आईपीएल के मालिकाना हक वाले ग्रुप से जुड़ी किसी भी लीग में कभी नहीं हुआ था.
3 / 6अब तक इंडियन प्रीमियर लीग से जुड़ी टीमें- चाहे वे SA20, ILT20, MLC या CPL में हों, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और क्रिकेट से जुड़े तनावों के कारण एक्टिव पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दूर ही रही थीं.
4 / 6जाहिर सी बात इसके बाद कई सवाल भी उठे. सनराइजर्स के हेड कोच डेनियल विटोरी ने अब इस बात पर रोशनी डाली है कि जब फ्रेंचाइजी ने ये फैसला लिया, तो पर्दे के पीछे असल में क्या चल रहा था. ऑक्शन के बाद बात करते हुए, विटोरी ने बताया कि सनराइजर्स का ऑरिजनल प्लान इंग्लैंड के लेग-स्पिनर आदिल राशिद के इर्द-गिर्द घूम रही थी. जब सदर्न ब्रेव ने उन्हें अपने साथ जोड़ लिया, तो लीड्स फ्रेंचाइजी ने तुरंत अपनी रणनीति बदल ली.
5 / 6विटोरी ने कहा, 'जब हम आदिल राशिद को नहीं ले पाए, जो शुरू में हमारी पहली पसंद थे, तो जाहिर है हमने विदेशी स्पिनर की तरफ रुख किया. चार या पांच खिलाड़ी ऐसे थे जिन पर हमारी नजर थी, और अबरार उनमें से एक थे. उन्हें पाकर हम बहुत खुश हैं.'
6 / 6ऑक्शन रूम का वो पल अपने आप में काफी रोमांचक था. ट्रेंट रॉकेट्स ने 100,000 पाउंड की शुरुआती बोली लगाई, जिसके बाद सनराइजर्स भी इस दौड़ में शामिल हो गए. दोनों टीमों के बीच बोली का सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि यह आंकड़ा 190,000 पाउंड तक नहीं पहुंच गया.