क्रिकेट पर इजरायल-ईरान जंग का साया, यहां खेलने के लिए नहीं मिल रही खास गेंद, अब क्या करेंगे प्लेयर्स?

Dukes balls Crisis Due to Iran Israel War: इजरायल और ईरान ने क्रिकेट की दुनिया पर एक अलग ही तरह से असर डाला है. इस बार इंग्लैंड क्रिकेट इसकी चपेट में आ गया है. अगर ईसीबी को लगा था कि घरेलू सीजन से पहले उनकी सबसे बड़ी चिंता पिचें या खिलाड़ियों का वर्कलोड होगी, तो अब उससे कहीं ज्यादा बड़ी और खतरनाक परेशानी सामने आ गई है. जेंटमैन गेम खेलने के लिए क्रिकेट की गेंदें ही नहीं हैं.

Iran War Duke Ball
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Iran Israel War Duke Ball

डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने ड्यूक्स गेंदों की सप्लाई को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है, जिससे नए सीजन से कुछ ही हफ्ते पहले इंग्लिश काउंटी टीमें परेशान हो गई हैं. नया काउंटी चैंपियनशिप सीजन 3 अप्रैल से शुरू होने वाला है, और जंग जल्द ही खत्म होती नहीं दिख रही है. काउंटी सीजन शुरू होने वाला है, जिसमें टोटल 18 टीमें एक साथ हिस्सा लेती हैं, और ऐसे में क्रिकेट के बुनियादी सामान की ही कमी हो गई है.

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इंग्लैंड में ड्यूक्स गेंदों की कमी क्यों है?

इंग्लैंड में ड्यूक्स गेंदों की कमी क्यों है?2 / 6

परेशानी इस बात में है कि ड्यूक्स गेंद कैसे बनाई और भेजी जाती है. जहां गेंद का चमड़ा इंग्लैंड में तैयार किया जाता है, वहीं उसकी सिलाई भारतीय उपमहाद्वीप में होती है, जिसके बाद तैयार गेंद को हवाई जहाज से वापस इंग्लैंड भेजा जाता है, आमतौर पर मिडिल ईस्ट के रास्तों से जाता. अब ये पूरी सप्लाई चेन ही ठप पड़ गई है.

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महंगी शिपमेंट

महंगी शिपमेंट3 / 6

एयर स्पेस में रुकावटों और माल ढुलाई की धीमी स्पीड के कारण, शिपमेंट की खेप जमा हो गई है. एयरलाइंस या तो इस क्षेत्र से होकर जाने से बच रही हैं, या फिर यहां से उड़ान भरने के लिए ज्यादा किराया वसूल रही हैं. बताया जा रहा है कि गेंदों के एक बक्से को भेजने का खर्च तीन गुना बढ़ गया है, और इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि गेंदें समय पर पहुंच नहीं पा रही हैं.

कंपनी के मालिक परेशान

कंपनी के मालिक परेशान4 / 6

ड्यूक्स गेंदें बनाने वाली कंपनी के मालिक दिलीप जाजोदिया ने इस स्थिति को बड़े ही साफ शब्दों में बताया. उन्होंने माना कि इंग्लैंड क्रिकेट इस वक्त एक 'बड़े संकट' का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा, 'इस गल्फ वॉर की बकवास की वजह से हम इस वक्त एक बड़े संकट में फंस गए हैं. हमें मजबूरन क्लबों को गेंदों की सप्लाई सीमित करनी पड़ रही है. सीजन की शुरुआत में हम उन्हें उनकी जरूरत की सिर्फ 50 फीसदी गेंदें ही दे पा रहे हैं, और बाकी की इंतेजाम बाद में करना होगा. उपमहाद्वीप में हमारी फैक्टरियों में काफी माल तैयार पड़ा है, लेकिन एयरलाइंस उसे ले जाने से मना कर रही हैं, क्योंकि वहाँ माल ढुलाई में भारी रुकावटें आ गई हैं.'

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अब इंग्लैंड क्रिकेट क्या करेगा?

अब इंग्लैंड क्रिकेट क्या करेगा?5 / 6

काउंटी टीमें इस सीजन की शुरुआत अपनी आम जरूरत के मुकाबले तकरीबन आधी गेंदों के साथ करने वाली हैं. ये एक बहुत बड़ी परेशानी है, खासकर तब जब हम चार-दिवसीय क्रिकेट की बात कर रहे हैं. ये एक ऐसा फॉर्मेट जिसमें आपको बार-बार गेंद बदलनी पड़ती है. जाहिर है, इस वजह से खेल पर भी बुरा असर पड़ेगा.

यूके नहीं पहुंच रहा सामान

यूके नहीं पहुंच रहा सामान6 / 6

उपमहाद्वीप में स्टॉक तैयार है, लेकिन इसे यूके तक पहुंचाना एक बड़ी रुकावट साबित हो रहा है. वैकल्पिक रास्तों की तलाश की जा रही है, जिसमें श्रीलंका के रास्ते खेप को भेजना भी शामिल है, लेकिन फिलहाल कुछ भी आसान नहीं है. हालात को और भी बदतर बनाते हुए, काउंटी टीमों ने पहले किए गए एक छोटे से एक्सपेरिमेंट के बाद अब कूकाबुरा गेंदों का इस्तेमाल करने से मना कर दिया है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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