April-May 2026 Wedding Dates: खरमास की विदाई से शुरू हुआ शहनाइयों का सीजन, जानें अप्रैल-मई में शादी की सबसे शुभ तिथियां
April-May 2026 Wedding Dates: सूर्य के मेष में गोचर के साथ खरमास खत्म हो चुका है और अब शादी का सीजन फिर शुरू हो गया है। अप्रैल-मई 2026 को ज्योतिष के अनुसार बेहद शुभ और ऊर्जा से भरा समय माना जा रहा है। आइए जानते हैं, अप्रैल-मई में शादी की सबसे शुभ तिथियां कब-कब हैं?

अप्रैल-मई में शादी के शुभ दिन और मुहूर्त
2 / 8April-May 2026 Wedding Dates: सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही पिछले एक महीने से चल रहा खरमास अब समाप्त हो चुका है। खरमास के समाप्त होते ही विवाह का मौसम एक बार फिर पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गया है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के बाद अब मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट चुकी है। ज्योतिषीय गणनाएं बता रही हैं कि अप्रैल और मई 2026 का समय बेहद शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरा है, जो शादी के लिए बेहद अनुकूल रहने वाला है, जिससे परिवारों में तैयारियां तेज हो गई हैं।
ग्रहों का मजबूत साथ
3 / 8पंचांग के अनुसार, अप्रैल-मई की इस अवधि में शुक्र और बृहस्पति की स्थिति विशेष रूप से प्रभावशाली मानी जा रही है। ज्योतिष के अनुसार, ये दोनों ग्रह वैवाहिक सुख, प्रेम और समृद्धि के कारक होते हैं। इनकी अनुकूल स्थिति रिश्तों में स्थिरता और समझ बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
अप्रैल में विवाह की शुभ तिथियां
4 / 8अप्रैल 2026 में कई अच्छे अवसर मिल रहे हैं। 15, 20, 21, 25, 27, 28 और 29 अप्रैल को विवाह के लिए अनुकूल दिन माने गए हैं। इन तिथियों पर नक्षत्रों का संतुलन ऐसा है, जो नए जीवन की शुरुआत के लिए सकारात्मक ऊर्जा देता है।
मई माह के मांगलिक मुहूर्त
5 / 8मई का महीना भी उत्सवों से भरा रहेगा। 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 और 14 मई को विवाह के लिए श्रेष्ठ योग बन रहे हैं। इन दिनों में ग्रहों का सहयोग कार्यों को बिना बाधा पूरा कराने में मददगार माना जाता है।
बेहद खास है ‘अबूझ’ मुहूर्त
6 / 8कुछ तिथियां ऐसी हैं जिन्हें सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है। 21 और 25 अप्रैल, साथ ही 5, 7 और 13 मई को विशेष शुभ योग बन रहे हैं। इन दिनों में किए गए विवाह को दीर्घकालिक सुख और आर्थिक मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। इसके साथ ही 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया यानी अबूझ मुहूर्त है। इस किसी भी समय विवाह और सगाई सम्पन्न किए जाते हैं।
मुहूर्त चुनने में रखें इनका ध्यान
7 / 8सिर्फ तारीख देखना पर्याप्त नहीं होता। भद्रा काल, सूर्योदय समय और चंद्र स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। वर और वधू की कुंडली का मिलान भी विवाह की सफलता के लिए अहम माना जाता है।
परंपरा और परिवार की भूमिका
8 / 8वैदिक रीति के अनुसार, बड़ों का आशीर्वाद हर मांगलिक कार्य को पूर्णता देता है। घर के बुजुर्गों की सहमति और विधि-विधान का पालन नकारात्मक प्रभावों को कम करता है। आज के समय में भी परंपरा और आधुनिक सोच का संतुलन विवाह को और मजबूत बनाता है।