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दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों की प्रगति धीमी पड़ रही है, और कुछ जगहों पर तो यह उल्टी दिशा में भी जा रही है. आज हम जानेंगे उन 7 देशों के बारे में जहां महिलाओं को सबसे बदतर हालात का सामना करना पड़ता है.
एक रिसर्च में सामने आई ये बात

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जॉर्जटाउन इंस्टीट्यूट फॉर वीमेन, पीस एंड सिक्योरिटी और पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो द्वारा तैयार किया गया WPS इंडेक्स, महिलाओं की भागीदारी, न्याय और सुरक्षा के आधार पर 181 देशों को रैंक देता है. दुनिया भर में बढ़ते संघर्षों के बीच, कई देशों में महिलाओं की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है. तो आज हम उन 7 देशों की सूची के बारे में बात करेंगे जहां महिलाओं को सबसे खराब और बुरे हालातों का सामना करना पड़ता है.
म्यांमार (WPS स्कोर: 0.442, रैंक: 172)

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सैन्य तख्तापलट के बाद हुई राजनीतिक उथल-पुथल और संघर्ष ने म्यामांर में महिलाओं की स्थिति को और भी बदतर बना दिया है. जारी हिंसा, विस्थापन और आर्थिक उथल-पुथल का महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी पर गहरा असर पड़ा है.
बुरुंडी (WPS स्कोर: 0.407, रैंक: 174)

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बुरुंडी में महिलाओं को व्यापक गरीबी, राजनीतिक अस्थिरता और शिक्षा व रोजगार तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ता है. देश की सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं में लैंगिक असमानता की जड़े काफी गहरी हो चुकी हैं.
दक्षिण सूडान (WPS स्कोर: 0.411, रैंक: 173)

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साल 2011 में आजादी मिलने के बावजूद, दक्षिण सूडान अभी भी संघर्ष और मानवीय संकटों से जूझ रहा है. बाल विवाह, हिंसा और अवसरों की कमी महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को गंभीर रुप से सीमित करती है.
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (WPS स्कोर: 0.405, रैंक: 175)

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डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है. यहां दशकों से चले आ रहे सशस्त्र संघर्ष ने डीआर कांगो के कुछ हिस्सों को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगहों में से एक बना दिया है. संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा और महिलाओं के लिए कमजोर न्याय प्रणाली भी देश के लोगों को परेशान कर रही है.
सूडान (WPS स्कोर: 0.397, रैंक: 177)

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सूडान में जारी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता ने महिलाओं के लिए एक खतरनाक माहौल बना दिया है. कई महिलाओं को सूडान से विस्थापित होना पड़ा. यहां संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच भी महिलाओं के लिए चिंता का विषय है. इस मामलें में अगर भारत की बात करें तो एक रिपोर्ट के मुताबिक, 146 देशों की सूची में भारत लगभग 129वें स्थान पर रहा है.