Oil Crisis: गल्फ से क्रूड ऑयल आना हुआ बंद तो सबसे पहले किन देशों का खत्म होगा तेल, क्या है भारत-PAK की स्थिति?
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को पूरी तरह से हिला रख दिया है. खाड़ी इलाके में हमले और होर्मुज स्ट्रेट के पास रूकावटों ने दुनिया भर में तेल की कीमतों को 100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है. जैसे-जैसे यह युद्ध तेज हो रहा है और इस चोकपॉइंट से शिपिंग धीमी हो रही है दुनिया भर में एक बड़ा संकट मंडरा रहा है. अगर खाड़ी से क्रूड ऑयल ग्लोबल मार्केट तक पहुंचना बंद जाता है तो आखिर किन देशों में सबसे पहले तेल खत्म होगा. एक ये सवाल भी लोगों के मन में अब उठने लगा है.

फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी हब में से एक
2 / 7फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी हब में से एक है. सऊदी अरब, कैवेत, यूएई, ईरान और इराक जैसे देश दुनिया भर में तेल की मांग का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं. इस तेल का ज्यादातर हिस्सा एशिया, यूरोप और दूसरे मार्केट तक पहुंचने से पहले और सबसे ज्यादा असर एशियाई इकोनॉमी पर ही पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें से कई ट्रांसपोर्टेशन, इंडस्ट्री और बिजली बनाने के लिए गल्फ ऑयल पर काफी ज्यादा निर्भर हैं.
कौन से देश तेल की कमी से हैं सबसे ज्यादा प्रभावित?
3 / 7कई एशियाई देश इंपोर्टेड तेल पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. उनके पास सीमित रिजर्व भी हैं. अगर गल्फ सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाती है तो इन देशों को कुछ हफ्तों में ही एनर्जी संकट का सामना करना पड़ेगा. इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित देश पाकिस्तान है. मिली जानकारी के अनुसार, ऐसा कहा जा रहा है कि देश के पास सिर्फ 20 से 28 दिनों का ही तेल रिजर्व में बचा है. क्योंकि पाकिस्तान सबसे ज्यादा इंपोर्ट पर निर्भर है इस वजह से सप्लाई में अगर किसी भी तरह की रूकावट हुई तो एक महीने के अंदर पाकिस्तान में गंभीर फ्यूल संकट पैदा हो सकता है.
इंडोनेशिया और वियतनाम पर पड़ेगा पहला असर
4 / 7पाकिस्तान के बाद तेल की कमी का गंभीर असर इंडोनेशिया और वियतनाम पर भी साफ दिखाई देगा. इंडोनेशिया द्वारा रिजर्व किया गया तेल अब लगभग 20 दिनों तक चलने का अनुमान है. इसी के साथ वियतनाम के पास लगभग 15 दिनों का ही रिजर्व में तेल बचा है. वहीं, थाईलैंड और फिलिपींस के पास थोड़ा बेहतर बफर है. उनके पास लगभग 60 दिनों का तेल रिजर्व में है.
भारत की क्या है स्थिति?
5 / 7भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल कंज्यूमर्स में से एक है. भारत देश अपने 80% से ज्यादा क्रूड ऑयल की जरूरतों को इंपोर्ट करता है. इन इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा गल्फ रीजन से आता है. इससे देश वहां की स्थितियों और रूकावटों के कारण कमजोर हो जाता है. भारत के पास अभी कथित तौर पर लगभग 50 दिनों के लिए तेल और पेट्रोलियम मौजूद है. जो रिजर्व में है. वहीं, सरकार ने रूस और दूसरे देशों सहित तेल इंपोर्ट करते अपने सप्लाई सोर्स को डायवर्सिफाई करने की भी कोशिश की है. इससे गल्फ प्रोड्यूसर्स पर उसकी डिपेंडेस कम हो गई है. हालांकि ईरान ने यह साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की सप्लाई सिर्फ अमेरिका, इजरायल और उनके पश्चिमी सहयोगियों के लिए बंद की गई है.
कौन से देश हैं तेज रिजर्व में मजबूत?
6 / 7कुछ देश पोटेंशियल तेल सप्लाई शॉक के लिए काफी ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार करके बैठे हैं. जिसमें जापान पहले नंबर पर है. जापान अपना लगभग 95% तेल मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करता है, लेकिन उसने दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोलियम रिजर्व में से एक बनाया है. जापान का यह रिजर्व 254 से 260 दिनों तक चल सकता है. वहीं, दूसरे नंबर पर है साउथ कोरिया. साउथ कोरिया भी गल्फ ऑयल पर काफी ज्यादा निर्भर है, लेकिन फिर भी उसके पास लगभग 208 से 210 दिनों का तेल रिजर्व है.
चीन पर पड़ेगा इसका असर?
7 / 7चीन दो दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है अपना लगभग आधा तेल गल्फ से लेता है. इसका अनुमानित रिजर्व लगभग 90 से 104 दिनों तक चल सकता है. वहीं, यूनाइटेड स्टेट्स (US) दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर बन चुका है. घरेलू प्रोडक्शन के अलावा यूएस के पास स्ट्रैटेजिक रिजर्व भी है. यह लगभग 161 से 200 दिनों तक चल सकता है.