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एयर न्यूजीलैंड की उड़ान TE901 एविएशन इतिहास की सबसे भयावह त्रासदियों में शुमार है. 28 नवंबर 1979 को अंटार्कटिका के माउंट एरेबस ज्वालामुखी से इस डीसी-10 विमान के टकराने से सवार 257 लोग मारे गए.

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एयर न्यूजीलैंड की उड़ान TE901 एविएशन इतिहास की सबसे भयावह त्रासदियों में शुमार है. 28 नवंबर 1979 को अंटार्कटिका के माउंट एरेबस ज्वालामुखी से इस डीसी-10 विमान के टकराने से सवार 257 लोग मारे गए.

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हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने इस घटना को पुनर्जीवित कर दिया, जिसमें व्हाइटआउट प्रभाव का वीडियो वायरल हो रहा है. पायलटों को सफेद बर्फीले मैदान का भ्रम हुआ, जबकि वे धधकते ज्वालामुखी की ओर बढ़ रहे थे.

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1977 से शुरू पर्यटन उड़ानों में अंटार्कटिका के मनमोहक दृश्य दिखाने वाली TE901 पूरी तरह बुक थी. कैप्टन जिम कॉलिन्स एवं फर्स्ट ऑफिसर ग्रेग कैसिन के नेतृत्व में 237 यात्रियों एवं 20 चालक दल सदस्य सवार थे.

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उड़ान से पूर्व नेविगेशन में 31 मील का विचलन हुआ, जो चालक दल को सूचित नहीं किया गया. मैकमुर्डो साउंड के बजाय विमान रॉस द्वीप की ओर मुड़ा, जहां 12,000 फीट ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी था. बेहतर दृश्य के लिए 2,000 फीट ऊंचाई पर उतरते ही व्हाइटआउट प्रभाव सक्रिय हो गया.

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इस ऑप्टिकल भ्रम में बर्फ एवं बादलों का एकसमान प्रकाश परावर्तन गहराई का अहसास मिटा देता है. पायलटों को ढलान सपाट मैदान लगा तथा चेतावनी अलार्म के छह सेकंड बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

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खोज में मलबा मिला, लेकिन 44 शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी. न्यूजीलैंड की यह सबसे बड़ी विमानन त्रासदी थी, जिसने लाखों को प्रभावित किया. जांच में नेविगेशन त्रुटि एवं कम ऊंचाई मुख्य कारण पाए गए.

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वायरल वीडियो ने इस घटना को नई पीढ़ी तक पहुंचाया, जो एविएशन सुरक्षा मानकों की याद दिलाता है. अंटार्कटिका पर्यटन उड़ानों पर प्रतिबंध लग गया तथा व्हाइटआउट जैसी चुनौतियों पर वैश्विक प्रशिक्षण बढ़ा. यह हादसा प्राकृतिक भ्रम की भयंकरता को उजागर करता है.