'पहाड़ियों की रानी' कहलाता है देश का ये जिला, कभी अलग राज्य बनाने की उठी थी मांग
Darjeeling History: भारत की गोद में बसा एक ऐसा जिला जो अपनी मखमली वादियों और चाय के बागानों के लिए विश्व प्रसिद्ध है. इसका सुनहरा इतिहास और सांस्कृतिक पहचान आज भी बेहद दिलचस्प मानी जाती है.

दार्जिलिंग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और लहराते पहाड़ों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यहां से कंचनजंगा पर्वत का नजारा और पुरानी टॉय ट्रेन की सवारी इसे पर्यटकों की पहली पसंद बनाती है.
क्या है इसका पुराना इतिहास?
2 / 6बहुत कम लोग जानते हैं कि दार्जिलिंग पहले सिक्किम राज्य का हिस्सा हुआ करता था. 18वीं सदी में गोरखाओं ने इस पर कब्जा कर लिया था जिसे बाद में अंग्रेजों ने आजाद कराया था.
कैसे मिला अंग्रेजों को तोहफा?
3 / 6साल 1835 में सिक्किम के राजा ने दार्जिलिंग के छोटे से इलाके को ब्रिटिश सरकार को उपहार में दिया था. इसके बदले में राजा को अंग्रेजों की तरफ से कुछ जरूरी सामान और कपड़े भेंट किए गए थे.
कब बना आज का जिला?
4 / 6भूटान और सिक्किम के साथ हुए सीमा विवादों को सुलझाने के बाद साल 1866 में इस जिले का वर्तमान स्वरूप सामने आया. आजादी के बाद भारत सरकार ने यहां शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में बड़े काम किए.
क्या थी अलग राज्य की मांग?
5 / 6दार्जिलिंग में लंबे समय तक अलग राज्य बनाने के लिए गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने बड़े आंदोलन किए थे. साल 1988 में एक समझौते के बाद यहां हिल काउंसिल का गठन हुआ और आंदोलन पर विराम लगा.
क्यों खास है यहां की रेल?
6 / 6दार्जिलिंग की हिमालयन रेलवे को विश्व धरोहर का दर्जा मिला हुआ है जो आज भी भाप इंजनों से चलती है. यह ट्रेन ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ते हुए सैलानियों को एक जादुई दुनिया का अहसास कराती है.