Ratna Shastra: नाम-पैसा और शान-ओ-शौकत दिला सकता है ये रत्न, जानिए नाम और धारण करने से जुड़े नियम

Top Gemstones for Money and Luxury: क्या आप भी अपनी घिसी-पिटी जिंदगी से परेशान हो गए हैं? अगर हां, तो एक शक्तिशाली रत्न धारण कर सकते हैं. चलिए जानते हैं उस एक रत्न के बारे में, जिसे धारण करने से धन, वैभव, नाम, ऐश्वर्या और सुख-समृद्धि आदि आकर्षित होती है.

Wearing diamond benefits
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राजा जैसी शाही जिंदगी जीने का सपना हर व्यक्ति का होता है, लेकिन कई बार किस्मत साथ नहीं देती है. रत्न शास्त्र में कई ऐसे रत्नों के बारे में बताया गया है, जिन्हें सही तरीके से धारण करने से धन, वैभव, सुख-समृद्धि और सफलता खुद-ब-खुद जीवन में आने लगती है. अगर आप भी शान-ओ-शौकत वाली जिंदगी जीना चाहते हैं तो डायमंड यानी हीरा धारण कर सकते हैं. आज हम आपको हीरा धारण करने के महत्व, लाभ और नियम आदि के बारे में बताने जा रहे हैं.

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हीरे का धार्मिक महत्व

हीरे का धार्मिक महत्व2 / 6

रत्न शास्त्र में हीरे का खास महत्व है, जिसका संबंध शुक्र ग्रह से है. शुक्र ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में धन, वैभव, ऐश्वर्या, सुख, समृद्धि और लग्जरी लाइफ का कारक माना गया है, जो व्यक्ति को विभिन्न सुख-सुविधा दिलाता है.

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पर्सनालिटी में भी आता है निखार

पर्सनालिटी में भी आता है निखार3 / 6

बता दें कि हीरा धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है. साथ ही पर्सनालिटी में निखार आता है, जिससे लोगों की अटेंशन मिलती है. इसके अलावा त्वचा में भी निखार देखने को मिलता है.

हीरा किन राशि के लोगों को पहनना चाहिए?

हीरा किन राशि के लोगों को पहनना चाहिए?4 / 6

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ, मिथुन, तुला और कुंभ राशि वालों के लिए हीरा पहनना शुभ और लाभदायक रहता है. यदि ये लोग सही विधि से हीरा धारण करते हैं तो कुछ ही समय में इनका अच्छा समय शुरू हो सकता है.

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किस समय, धातु और उंगली में धारण करें हीरा?

किस समय, धातु और उंगली में धारण करें हीरा?5 / 6

किसी भी महीने में शुक्रवार के दिन शुक्ल पक्ष में सूर्योदय के बाद हीरा धारण किया जा सकता है. बता दें कि इसे सोने, चांदी या प्लैटिनम की अंगूठी या लॉकेट में पहना जाता है. हालांकि, किसी भी हाथ की अनामिका या मध्यमा उंगली में ही हीरा धारण करना चाहिए.

हीरा धारण करने के विधि

हीरा धारण करने के विधि6 / 6

हीरा धारण करने से पहले उसे गंगाजल, कच्चे दूध और शहद से शुद्ध कर लें. फिर 108 बार 'ॐ शुं शुक्राय नमः' मंत्र का जाप करते हुए उसे धारण करें. (All Image Credit- Meta AI) (डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी रत्न शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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