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Jalebi Ka Shape Kaisa Hota Hai: जलेबी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. खाने के बाद गरमा-गरम जलेबी मिल जाए तो मजा आ जाता है. चाशनी में डूबी हुई जलेबी हर त्योहार के लिए एकदम परफेक्ट मानी जाती है. भारत के कई शहरों में जलेबी बहुत ही ज्यादा पसंद की जाती है, लेकिन इसे खाते वक्त आपने कभी सोचा है कि जलेबी हमेशा गोल-गोल और टेढ़ी-मेढ़ी ही क्यों बनती है? इसके पीछे का क्या इतिहास रहा है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

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इसके पीछे सिर्फ कुकिंग स्टाइल नहीं, बल्कि इतिहास और विज्ञान दोनों जुड़े हैं. अगर जलेबी सीधी बनाई जाए तो उसमें चाशनी सही तरह से नहीं भर पाएगी. इसलिए इसका ऐसा शेप स्वाद और टेक्सचर दोनों के लिए जरूरी है.

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13वीं सदी की एक किताब जिसका नाम किताब अल-तबीख है. इसमें जलाबिया बनाने की विधि का उल्लेख इसी तरह से किया गया है. वहीं, भारतीय ग्रंथों में भी जलेबी जैसी मिठाई का वर्णन हुआ, जिससे पता चलता है कि यह सदियों से लोकप्रिय है.

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जलेबी के स्पाइरल डिजाइन का एक वैज्ञानिक कारण यह है कि अगर ज्यादा किनारे होंगे तो ज्यादा फ्राइंग एरिया मिलेगा और पतली लेयर क्रिस्पी टेक्सचर देने का काम करेगी. जलेबी का गोल आकार चाशनी के लिए एकदम परफेक्ट माना गया है.

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जलेबी का बनाने का तरीका ऐसा है जिससे सीधा शेप बनाना काफी मुश्किल होता है. जलेबी को बैटर को कपड़े या बोतल से सीधे गर्म तेल में घुमाकर ही बनाया जाता है. अगर जलेबी सीधी बनाई जाए तो उसमें चाशनी सही तरह से नहीं भर पाएगी.

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जलेबी का टेढ़ा-मेढ़ा आकार कोई गलती नहीं है बल्कि स्वाद, टेक्सचर और परंपरा का शानदार मेल है. वक्त ने सबकुछ बदल दिया लेकिन जलेबी का शेप नहीं बदल पाया. ऐसे इसलिए क्योंकि इसे खाने का मजा इसी शेप में है.