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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. भारत इस संघर्ष से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है. तेल सप्लाई में रुकावट, आयात-निर्यात पर असर और महंगाई बढ़ने की आशंका ने सरकार और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है.

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ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष से पूरा मिडिल ईस्ट अस्थिर हो गया है. लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई से क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है.

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होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. भारत अपने करीब 40–50 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से करता है. अगर यहां से तेल आपूर्ति बाधित होती है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

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ईरान-इजरायल तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका असर ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा.

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ईरान भारत के लिए बासमती चावल, चाय और फार्मा उत्पादों का अहम बाजार रहा है. वहीं, ईरान से भारत को होने वाले मुख्य एक्सपोर्ट में सेब, पिस्ता, खजूर और कीवी शामिल हैं. संघर्ष के चलते शिपिंग और पेमेंट सिस्टम में दिक्कत आने से भारतीय निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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भारत अपनी तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. अगर मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होती है, तो भारत को वैकल्पिक देशों से महंगे दाम पर तेल खरीदना पड़ सकता है.

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तेल की कीमतें बढ़ने से रुपये पर दबाव, चालू खाते का घाटा और महंगाई बढ़ सकती है. ऐसे में सरकार और RBI को टैक्स कटौती या बाकी राहत कदम उठाने पड़ सकते हैं.
(All Photos Credit: Social Media)