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भारत में बहने वाली नदियों से जुड़ी आपने कई रोचक बातें सुनी होगी, जो काफी हैरान कर देने वाली होती हैं. कोई नदी अपनी विरासत के लिए जानी जाती है, तो कोई लंबाई के लिए, तो किसी को मां के समान पूजा जाता है. लेकिन आज की स्टोरी में हम एक ऐसी अनोखी नदी के बारे में बात करें, जिसका जिक्र रामायण में है. यह न तो गंगा है और न ही यमुना, आइए जानते हैं इसका नाम.

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भारत में बहने वाली हर नदी का अपना एक अलग इतिहास और महत्व है. इनमें से कुछ नदियां इतनी प्रसिद्ध हैं कि उनका जिक्र प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. लेकिन क्या आप जानते हैं, रामायण में एक खास नदी का उल्लेख है, जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं.

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भारत की नदियां सिर्फ जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि इनके साथ संस्कृति और आस्था भी जुड़ी हुई है. लोग इन्हें मां के रूप में पूजते हैं और साथ ही, इनके बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल है.

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लेकिन हम जिस नदी के बारे में बताएंगे, वह बहुत खास है, क्योंकि रामायण में इसका जिक्र है. अगर आप सोच रहे हैं कि यह नदी गंगा है, या यमुना, या फिर ब्रह्मपुत्र, तो आप एकदम गलत है. यह अपनी धार्मिक और पौराणिक महत्व के कारण बाकी नदियों से अलग और बहुत ही खास मानी जाती है.

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रामायण में वर्णित यह नदी अयोध्या के उत्तरी हिस्से से बहती है. स्थानीय लोग इसे 'सरयू नदी' के नाम से जानते हैं. कुछ लोग इसे घाघरा नदी के नाम से भी पहचानते हैं.

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हिंदू धर्म में इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है और ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने इस नदी को आशीर्वाद दिया था.

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सरयू नदी हिमालय की तलहटी से निकलती है और शारदा नदी की सहायक नदी बन जाती है. यह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश होकर लगभग 350 किलोमीटर लंबी यात्रा तय करती है.

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, सरयू नदी के तट पर श्रवण कुमार ने राजा दशरथ की हत्या की थी. वहीं, कुछ कथाओं में इसे धरती के नीचे बहने वाली अनोखी नदी भी कहा गया है, जो इसे और रहस्यमयी बनाता है. (Image: Pexels)