क्या है रंगा बिल्ला केस? जिस पर बनी वेब सीरीज 'राख' ने याद दिलाई दिल्ली के भाई-बहन संग हुई हैवानियत की कहानी

अमेजन प्राइम वीडियो पर एक वेबसीरीज रीलीज हुई है जिसका नाम है'राख'. प्राइम वीडियो की मच-अवेडिट इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर 'राख' का दूसरा ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है, जिसमें सस्पेंस के साथ-साथ इमोशन्स का डबल डोज नजर आ रहा है. ये एक काल्पनिक प्रोसीजरल इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर है, जिसमें दुख, नैतिकता और मानवीय क्रूरता के अलावा इमोशन्स से भरपूर किरदार दिल और दिमाग को झकझोर देने वाले हैं. बता दें कि 'राख' 12 जून को पूरे भारत और दुनिया भर में प्राइम वीडियो पर हिंदी में प्रीमियर के लिए तैयार है. इन्वेस्टिगेटिव क्राइम थ्रिलर, 'राख' का दूसरा ट्रेलर काफी सस्पेंस और क्रूरता से भरा है.

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48 साल पहले के घाव को कर दिया ताजा

48 साल पहले के घाव को कर दिया ताजा2 / 10

प्राइम पर इसके ट्रेलर रिलीज हो चुके हैं. 'राख' सीरीज ने 48 साल पहले की एक ऐसी घटना को ताजा कर दिया है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. बता दें कि यह वेबसीरीज नौसेना के एक अधिकारी के दो बच्चों की किडनैपिंग और उनकी नृशंस हत्या से जुड़ी हुई है. इस केस को 'रंगा बिल्ला' केस के नाम से जाना जाता है. लगभग आधी सदी बीतने के बाद भी आज भी कई लोग रंगा बिल्ला केस को नहीं भूल पाए हैं. यह एक ऐसा केस था जिसके बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई थी और डर भी. वहीं, रंगा बिल्ला नाम के अपराधियों को फांसी दे दी गई. यह फांसी सजा-ए-मौत के इतिहास में सबसे हाई प्रोफाइल मानी गई.

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उस शाम को क्या हुआ था?

उस शाम को क्या हुआ था?3 / 10

नौसेना में कैप्टन मदन मोहन चोपड़ा दिल्ली के धौलाकुआं के पास ही सरकारी क्वार्टर में रहते थे. उनकी एक बेटी और एक बेटा था. बेटी का नाम गीता चोपड़ा (16 साल) और बेटे का नाम संजय चोपड़ा (13 साल) था. आम तौर पर दोनों रोज ही शाम को खेलने जाते थे लेकिन 26 अगस्त 1978 के उस दिन उनका प्लान कुछ अलग ही था. गीता चोपड़ा को आकाशवाणी के 'युववाणी कार्यक्रम' में शामिल होने के लिए आकाशवाणी केंद्र जाना था और धौला कुआं से आकाशवाणी केंद्र की दूरी लगभग 5 से 6 किलोमीटर ही है. बहन गीता के साथ संजय का भी प्लान बन चुका था और उसे भी वहां जाना था. इधन मदन मोहन चोपडा ने दोनों बच्चों से वादा किया था कि वह गीता का प्रोग्राम रेडियो पर जरूर सुनेंगे.

रास्ते में ली लिफ्ट और कभी नहीं पहुंचे आकाशवाणी केंद्र

रास्ते में ली लिफ्ट और कभी नहीं पहुंचे आकाशवाणी केंद्र4 / 10

जब गीता घर से निकली तो उस शाम तेज बारिश हो रही थी. रात में 8 बजे क्रार्यक्रम का सीधा प्रसारण होना था. ऐसे में 6 बजे के करीब गीता और संजय आकाशवाणी भवन के लिए अपने घर से निकले. रास्ते में उन्होंने डॉ. एम. एस. नंदा से लिफ्ट ली. नंदा ने उन्हें आकाशवाणी भवन से करीब एक किलोमीटर पहले गोल डाकखाने पर ड्रॉप कर दिया था. इसके बाद वे दोनों कभी आकाशवाणी केंद्र पहुंचे ही नहीं.

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रेडियो पर नहीं सुनाई दी गीता की आवाज

रेडियो पर नहीं सुनाई दी गीता की आवाज5 / 10

कार्यक्रम का समय हो गया था और जब चोपड़ा परिवार ने रेडियो ऑन किया तो उसमें गीता चोपड़ा की जगह किसी और की आवाज सुनने को मिली. कैप्टन चोपड़ा को कुछ समझ नहीं आया तो वह तुरंत अपनी गाड़ी से आकाशवाणी भवन के लिए रवाना हुए. वहां पहुंच कर पता चला कि दोनों भाई-बहन वहां पहुंचे ही नहीं. इसके बाद कैप्टन चोपड़ा ने अपने सभी जानकारों को संपर्क किया लेकिन किसी को भी बच्चों के बारे में कुछ नहीं पता था. इसके बाद थक हार कर इस मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और फिर छानबीन शुरू हुई.

जंगल में मिले थे दोनों के शव

जंगल में मिले थे दोनों के शव6 / 10

दोनों बच्चों के गायब होने के दो दिन बाद यानी 28 अगस्त को चरवाहे को जंगल में दो शव मिले. उसने पुलिस को जानकारी दी. पता चला कि ये शव गीता और संजय के ही हैं. इस घटना ने पूरे देश को हिला के रख दिया था. गीता का शव सड़ने लगा था. पोस्टमॉर्टम में पता चला कि दोनों को चाकू से गोदा गया है. हालांकि यह नहीं पता चल पाया कि गीता का यौन शोषण हुआ था या नहीं. संजय के शरीर पर कम से कम 25 घाव बने थे. जिससे पता चला कि दोनों ने किडनैपर्स के साथ जमकर हाथा-पाई भी हुई थी. ऐसे में किडनैपर्स को भी चोट आई होगी.

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रंगा-बिल्ला कैसे पकड़े गए?

रंगा-बिल्ला कैसे पकड़े गए?7 / 10

पुलिस की निगाह अस्पतालों पर थी. अगर किडनैपर्स भी घायल हुए तो वो किसी ना किसी अस्पताल जरूर गए होंगे. यह केस पूरे देश के अखबारों की हेडलाइन बना रहा था. वे दोनों दो हफ्तों से फरार चल रहे थे. 8 सितंबर 1978 को रंगा और बिल्ला आगरा के पास कालका मेल पर चढ़े. यह ट्रेन दिल्ली आ रही थी. गलती से वे सैनिकों के लिए आरक्षित डिब्बे में चढ़ गए.

बरामद हुआ था खून से सना कपड़ा

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लांस नायक गुरतेज सिंह और एवी शेट्टी ने उनसे आईकार्ड मांगा. उनके व्यवहार से सेना के अधिकारियों को गड़बड़ी का शक हुआ. गुरतेज सिंह के पास अखबार भी था जिसपर इनकी तस्वीर छपी थी. इसके बाद सेना के अधिकारियों ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और सुबह करीब 3.30 बजे पुलिस को सौंप दिया. रंगा-बिल्ला के पास से कृपाण के अलावा 0.32 बोर कारतूस और खून से सने कपड़े भी मिले. दोनों की गिरफ्तारी इस केस की बड़ी कामयाबी थी.

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कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

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रंगा बिल्ला को अपहरण और हत्या का आरोपी बनाया गया. निचली अदालत में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. इसके बाद दोनों आरोपियों ने हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी. तिहाड़ जेल में उन दोंनों हत्यारों को 31 जनवरी 1982 को फांसी दी गई. इसके बाद पूरे देश में ही लोग बच्चों को अकेले कहीं भेजने से डरने लगे थे. पांच दशक के बाद भी इस केस को लोग भूल नहीं पाए हैं.

जेल में दोनों के बीच होती थी लड़ाई

जेल में दोनों के बीच होती थी लड़ाई10 / 10

लेखक सुनील गुप्ता के मुताबिक रंगा बहुत ही निर्दयी इंसान था. वह हमेशा खुश ही रहता था. उसे मौत की सजा का भी जरा सा दुख नहीं था. वहीं बिल्ला टैक्सी चालक था. उसका कद करीब 5 फीट था. वह हमेशा ही रोता रहता था और रंगा को कोसता रहता था कि उसने ही फंसवा दिया. इस बात को लेकर जेल में दोनों की तकरार हुआ करती थी. फांसी के बाद रंगा और बिल्ला के रिश्तेदारों ने उनका शव स्वीकार नहीं किया और उनकी अंत्येष्टि जेल में ही की गई.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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