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वित्त वर्ष 2025-26 में PF खाताधारकों के लिए ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने ब्याज की दरों में न कटौती की है और न ही बढ़ोतरी की है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने ब्याज दर पर फैसला लिया है, जिस पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने मुहर लगा दी है।
CBT मीटिंग में तय होती बयाज दर

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बता दें कि PF के लिए ब्याज की दर फाइनेंशियल ईयर के आखिर में तय होती है। सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी की बैठक होती है, जिसमें मौजूदा वित्तीय वर्ष में जमा हुए पैसे का हिसाब किताब पेश किया जाता है। फिर सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की मीटिंग होती है, जिसमें ब्यान की दरें फाइनल होती हैं। इस मीटिंग के फैसले को ही वित्त मंत्रालय लागू करता है।
जून से सितंबर के बीच आएगा पैसा

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बता दें कि PF की ब्याज दर लागू होने के बाद ब्याज की रकम खातों में जमा कर दी जाती है। क्योंकि मौजूद वित्त वर्ष के लिए ब्याज की दर लागू हो चुकी तो खातों में पैसा जून से सितंबर महीने के बीच आ जाएगा। जैसे वित्त वर्ष 2024-25 में लगे ब्याज का पैसा जुलाई 2025 में खातों में डाला गया था। क्योंकि पैसा डालने की तारीख तय नहीं, इसलिए समय-समय पर बैलेंस चेक करते रहें।
देर होने पर नहीं होगा कोई नुकसान

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बता दें कि PF के ब्याज का पैसा क्रेडिट होने में अगर देरी हो जाए तो खाताधारकों को कोई नुकसान नहीं होगा। EPFO ने इस बारे में स्पष्ट कर दिया है कि खाते में ब्याज का पैसा क्रेडिट होने में देरी होने से कोई वित्तीय नुकसान नहीं होता है। नवंबर 2024 में नियम बदले गए थे, जिसके अनुसार सेटलमेंट की तारीख तक का पूरा ब्याज दे दिया जाता है, जबकि पहले केवल पिछले महीने तक का ब्याज मिलता था।
पासबुक लाइट से चेक करें अपना बैलेंस

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EPFO ने खाते में बैलेंस चेक करने के लिए पासबुक लाइट फीचर शुरू किया है। इससे बैलेंस चेक करने के लिए EPFO की वेबसाइट पर जाएं और UAN के जरिए लॉगिन करें। ऊपर बाईं ओर View ऑप्शन पर क्लिक करें। ड्रॉप डाउन मेन्प्यू से Passbook Lite सेलेक्ट करें। यहां पिछली 5 कंपनियों के PF की डिटेल होगी। पूरी जानकारी के लिए मेंबर आईडी चुनकर View Passbook पर क्लिक करें।
1952 में 3% ब्याज से शुरुआत हुई थी

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बता दें कि 1952 में PF पर ब्याज दर केवल 3% थी। 1972 में यह बढ़कर 6% और 1984 में 10% पहुंच गई। PF धारकों को 1989 से 1999 के दौरान सबसे ज्यादा 12% ब्याज मिलता था। 1999 के बाद ब्याज दर कभी भी 10% के करीब नहीं पहुंची। 2001 के बाद से ब्याज दर 9.50% के नीचे ही रही है। पिछले 7 साल से यह 8.5% या उससे कम रही है। वहीं पिछले 5 साल से 8.10 से 8.25 के बीच चल रही है।