गजब का अनुशासन! महाराष्ट्र में 'वानर सेना' के लिए सजी शाही पंगत, कतार में बैठकर बंदरों ने खाई मिठाई
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक बेहद अनोखी और दिलचस्प परंपरा देखने को मिली. बार्शिटाकळी तालुका के कोथळी बुजुर्ग गांव में पिछले 20 वर्षों से एक खास आयोजन किया जाता है. यहां इंसानों के लिए नहीं, बल्कि बंदरों के लिए मिठाइयों की भव्य पंगत सजाई जाती है. (राहुल पांडे की रिपोर्ट)

20 साल पुरानी परंपरा
2 / 7मुंगसाजी महाराज संस्थान की ओर से आयोजित इस परंपरा में बंदरों को उनकी पसंदीदा मिठाइयों का भोज कराया जाता है. हैरानी की बात यह है कि जैसे ही भोजन परोसा जाता है, बंदर खुद-ब-खुद पेड़ों से उतरकर आते हैं और पूरी शालीनता के साथ कतार में बैठ जाते हैं.
सजती हैं थालियां
3 / 7सबसे पहले मंदिर परिसर में थालियां सजाई जाती हैं, फिर बिना किसी निमंत्रण के बंदर वहां पहुंचते हैं और एक-एक कर अनुशासन में बैठ जाते हैं.
थाली में मिठाइयां
4 / 7इसके बाद हर बंदर को एक-एक थाली परोसी जाती है, जिसमें मिठाइयां होती हैं. बंदरों का यह अनुशासित व्यवहार देखने वालों को चकित कर देता है.
इंसानों को सीख
5 / 7घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर में चल रही यह परंपरा न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि इंसानों को भी अनुशासन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है.
देखकर हर कोई हैरान
6 / 7हनुमान जयंती पर ‘वानर सेना’ का यह अनोखा स्वागत हर साल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है.
वर्षों पुरानी परंपरा
7 / 7इस मौके पर मुंगसाजी महाराज संस्थान के पुजारी रामदास शिंदे महाराज ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल इसे बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है.
