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केंद्र सरकार ने फास्टैग को लेकर आदेश दिया है कि अगर फास्टैग से टोल टैक्स का भुगतान नहीं होता है और वाहन चालक टोल बैरियर को क्रॉस करके चला जाता है तो उसे 72 घंटे के अंदर टोल टैक्स चुकाना ही होगा। 72 घंटे के बाद दोगुना टैक्स भरना होगा, जिसे जुर्माना माना जाएगा।
फास्टैग पेमेंट का नया नियम क्यों बनाया?

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केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है। वहीं फास्टैग से टोल टैक्स की पेमेंट का नियम इसलिए सख्त किया है, ताकि कोई ड्राइवर टोल टैक्स दिए बिना न जा सके। साथ ही डिजिटल टोल टैक्स सिस्टम और मजबूत बने। टोल टैक्स के नियमों का पालन सुनिश्चित हो।
फास्टैग को लेकर टोल एजेंसियों पर सख्ती

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बता दें कि केंद्र सरकार ने सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी सख्ती बरती है। ड्राइवरों के साथ-साथ टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। निर्देश जारी हुआ है कि अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिन के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल नहीं भरना पड़ेगा।
फास्टैग अनपेड यूजर फीस किस कहते हैं?

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केंद्र सरकार ने फास्टैग अनपेड यूजर फीस को डिफाइन किया है, जो वह टोल टैक्स है जिसकी पेमेंट नहीं की जाती और ड्राइवर टोल बैरियर क्रॉस कर जाता है। ऐसे मामलों में रजिस्टर्ड व्हीकल ऑनर को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें व्हीकल की डिटेल, टोल बैरियर पार करने की तारीख, जगह और पे की जाने वाली रकम लिखी होगी। यह नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और खास पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम को व्हीकल डेटाबेस 'वाहन' से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया टोल टैक्स वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके।
FASTag यूजर्स के लिए बेहद जरूरी सलाह

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केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, जुर्माना भरने से बचने के लिए FASTag में बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें और अगर कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। 72 घंटे के अंदर टोल टैक्स का भुगतान जरूर करें।