
1 / 9
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के बावजूद भारतीयों में दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा है. इसके पीछे जेनेटिक्स, ‘थिन-फैट’ बॉडी, डायबिटीज, प्रदूषण और खराब लाइफस्टाइल जैसे कई छिपे कारण जिम्मेदार हैं.
छिपा हुआ खतरा: बिना लक्षण के बढ़ता जोखिम

2 / 9
कई भारतीय ऐसे होते हैं जो न स्मोकिंग करते हैं, न शराब पीते हैं और उनका वजन भी सामान्य रहता है, फिर भी उन्हें दिल की बीमारी का खतरा बना रहता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण एशियाई लोगों में हार्ट डिजीज का जोखिम बाकी देशों के लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है. समस्या है कि ये खतरा लंबे समय तक बिना किसी साफ लक्षण के शरीर में बढ़ता रहता है, जिसे समय पर पहचान पाना मुश्किल हो जाता है.
जेनेटिक्स होते हैं वजह

3 / 9
भारतीयों में दिल की बीमारी का एक बड़ा कारण genetics होता है. अगर परिवार में पहले से किसी को हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी बीमारी रही है, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा बढ़ जाता है. खासकर Lipoprotein(a) नाम का तत्व भारतीयों में ज्यादा पाया जाता है, जो खून की नलियों में प्लाक जमाने का काम करता है. इससे कम उम्र में ही ब्लॉकेज बनने लगता है.
'थिन-फैट' बॉडी: बाहर से फिट, अंदर से जोखिम

4 / 9
कई लोग देखने में पतले और फिट लगते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होती है. इसे 'थिन-फैट' बॉडी टाइप कहा जाता है. ये अंदरूनी फैट (visceral fat) दिल और ब्लड वेसल्स के लिए बेहद खतरनाक होता है. यही वजह है कि सामान्य वजन वाले लोग भी हार्ट डिजीज के शिकार हो सकते हैं.
कम उम्र में शुरू हो जाता है खतरा

5 / 9
रिसर्च बताती है कि भारतीयों में हार्ट डिजीज का खतरा कम उम्र में ही शुरू हो जाता है. जहां पश्चिमी देशों में ये समस्या आमतौर पर 50-60 साल की उम्र में दिखती है, वहीं भारत में 30-40 साल के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. यही वजह है कि युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस

6 / 9
भारतीयों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है. ये स्थिति शरीर में शुगर के स्तर को असंतुलित करती है, जिससे खून की नलियों को नुकसान पहुंचता है. प्रीडायबिटीज की स्थिति भी दिल की बीमारी के खतरे को बढ़ा देती है, भले ही व्यक्ति बाहर से स्वस्थ दिखता हो.
मॉर्डन लाइफस्टाइल का असर

7 / 9
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग फिजिकल एक्टिविटी कम कर रहे हैं. घंटों बैठकर काम करना, जंक फूड का ज्यादा सेवन, नींद की कमी और लगातार तनाव, ये सभी कारक दिल की बीमारी को बढ़ावा देते हैं. भले ही व्यक्ति धूम्रपान या शराब से दूर हो, लेकिन गलत दिनचर्या भी उतनी ही खतरनाक साबित हो सकती है.
प्रदूषण: अनदेखा लेकिन गंभीर खतरा

8 / 9
भारत जैसे देशों में वायु प्रदूषण एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा बन चुका है. हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5) शरीर में जाकर सूजन और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.
समय पर जांच: बचाव का सबसे बड़ा तरीका

9 / 9
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि भारतीयों को कम उम्र से ही नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए. 25-30 साल की उम्र के बाद कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी है. समय पर पहचान होने पर लाइफस्टाइल में बदलाव और इलाज के जरिए दिल की बीमारी से बचा जा सकता है.
(All Photos Credit: Social Media)