स्ट्रोक के बाद हर वक्त महसूस होती है थकान? जानिए क्या है पोस्ट-स्ट्रोक फटीग और इसके लक्षण
स्ट्रोक के बाद होने वाली थकान को आलस नहीं समझना चाहिए. परिवार को मरीज की परेशानी समझनी चाहिए और उसका साथ देना चाहिए. अगर थकान लंबे समय तक बनी रहती है तो डॉक्टर से टेस्ट करवाना चाहिए.

स्ट्रोक अचानक नहीं आता, क्योंकि इससे पहले शरीर कई तरह से लक्षण दिखाता है. अगर आपके सामने किसी को अचानक चक्कर आ जाएं या कमजोरी महसूस हो तो इसे नॉर्मल बीमारी नहीं समझना चाहिए. हालांकि, कई बार स्ट्रोक के बाद मरीजों को चलने-फिरने, बोलने और रोजाना के काम करने में परेशानी होती है. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें स्ट्रोक से रिकवरी के दौरान लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती रहती है. हैरानी की बात यह है कि कई बार आराम करने और नींद लेने के बावजूद यह थकान दूर नहीं होती. अगर आपको भी थकान महसूस होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पोस्ट-स्ट्रोक फटीग का शुरुआती लक्षण हो सकता है.नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की रिसर्च और इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिजीत गायकवाड़ के मुताबिक, पोस्ट-स्ट्रोक फटीग स्ट्रोक के बाद होने वाली एक आम समस्या है, लेकिन अक्सर लोग इसे सिर्फ कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर स्ट्रोक के बाद शरीर में लगातार थकान क्यों बनी रहती है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं.
क्या होता है स्ट्रोक?
2 / 7स्ट्रोक यानी दिमाग की नस फट जाना, खून बन जाना, खून की सप्लाई रुक जाना और दिमाग का डेड हो जाना. इसलिए इसपर वक्त पर ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि दिमाग की नस ज्यादा देर तक बंद रहने से इंसान की जान जा सकती है. इसे भी पढ़ें- पटाखों से आंखों को हो सकता है नुकसान, AIIMS ने बताया किन गलतियों से बचना है जरूरी, कैसे बरतें सावधानी
क्या होता है पोस्ट-स्ट्रोक फटीग?
3 / 7पोस्ट-स्ट्रोक फटीग में स्ट्रोक से गुजर चुके इंसान को शारीरिक रूप से लगातार थकान महसूस होती है. इस दौरान मरीज को छोटे-छोटे काम करने में भी काफी मेहनत करनी पड़ सकती है. कई बार नहाने, कपड़े पहनने, खाना खाने या थोड़ी देर चलने के बाद भी इंसान थका हुआ महसूस करने लगता है.
दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान
4 / 7स्ट्रोक की वजह से दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. इसके बाद दिमाग को रोजाना के काम करने में पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है. ध्यान लगाना, चलना और बोलना भी थकाने वाला हो सकता है. इसके अलावा, नींद की कमी, चिंता, तनाव, दर्द और कुछ दवाओं की वजह से भी बढ़ सकती है.
अंदर से थका हुआ महसूस होना
5 / 7इस समस्या से जूझ रहे मरीजों को बार-बार आराम करने की जरूरत पड़ सकती है. उन्हें किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और थोड़े से काम के बाद भी कमजोरी महसूस हो सकती है. कई बार मरीज बाहर से हेल्दी दिखाई देता है, लेकिन अंदर से बहुत थका हुआ महसूस करता है.
क्या पोस्ट-स्ट्रोक फटीग नॉर्मल कमजोरी से अलग है?
6 / 7पोस्ट-स्ट्रोक फटीग नॉर्मल थकान से अलग हो सकती है. वैसे ज्यादा काम करने या शारीरिक मेहनत के बाद थकान होती है, जो आराम करने और सोने के बाद कम हो जाती है. मगर पोस्ट-स्ट्रोक फटीग में बिना ज्यादा मेहनत किए भी थकान महसूस हो सकती है.
थकान कम करने के लिए क्या करें?
7 / 7इस परेशानी को कम करने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. वक्त पर सोना, बैलेंस डाइट लेना, काम के बीच आराम करना और डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे व्यायाम करना मददगार हो सकता है. मरीज को अपनी क्षमता के अनुसार काम करना चाहिए और उसे जरूरत से ज्यादा मेहनत करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए. इसे भी पढ़ें- Air Pollution: सिर्फ फेफड़े ही नहीं, शरीर के इन 5 अंगों को भी नुकसान पहुंचाती है जहरीली हवा; जानिए कैसे रखें अपना ख्याल अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है. Source- NCBI