लिवर खराब होने पर पैरों में क्या होता है? ये लक्षण बिल्कुल नहीं करने चाहिए नजरअंदाज
Fatty Liver Feet Symptoms: लिवर का फैटी होना बहुत आम हो गया है, लेकिन अगर वक्त पर ध्यान ना दिया जाए तो पैरों में भी लक्षण नजर आने लगते हैं और ये किस तरह के लक्षण हो सकते हैं, आइए विस्तार से जानते हैं.

Foot Pain With Swelling: लिवर की बीमारी होना आम है, जो लाइफस्टाइल पर ध्यान ना देने की वजह से भी हो सकता है. इसलिए वक्त पर लिवर की हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि इसका इलाज वक्त पर किया जा सके. हालांकि, लिवर की बीमारी होने पर पैरों में सूजन, भारीपन, खुजली, मांसपेशियों की कमजोरी या स्किन के रंग में बदलाव जैसे लक्षण कुछ मामलों में लिवर की बीमारी से जुड़े हो सकते हैं, खासकर जब इनके साथ पीलिया, पेट में सूजन या लगातार थकान जैसे लक्षण भी मौजूद हों. इसलिए किसी भी लगातार रहने वाले या बढ़ते हुए लक्षण को नजरअंदाज न करें.
पैरों और टखनों में सूजन
2 / 7कई लोगों को लगता है कि ऐसा चलने की वजह से होता है, लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि लिवर की गंभीर बीमारी होने पर पैरों और टखनों में सूजन हो सकती है. ध्यान न देने पर परेशानी बढ़ सकती है. इसे भी पढ़ें- दादी-नानी के नुस्खों का राज! ये 6 आयुर्वेदिक हर्ब्स बन सकते हैं आपकी First Aid Kit
पैरों में भारीपन और जकड़न
3 / 7कई बार तरल पदार्थ जमा होने की वजह से पैरों में भारीपन, कसाव या जकड़न महसूस हो सकती है. लंबे समय तक खड़े रहने या चलने पर यह परेशानी और बढ़ सकती है. इसलिए वक्त पर डॉक्टर को दिखाएं.
पैरों में खुजली होना
4 / 7लिवर से जुड़ी कुछ बीमारियों में पित्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है. इससे शरीर में कुछ पदार्थ जमा होने लगते हैं, जो स्किन में तेज खुजली का कारण बन सकते हैं.
मांसपेशियों में कमजोरी और ऐंठन होना
5 / 7लिवर की लंबे समय तक रहने वाली बीमारी में शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है. इससे पैरों की मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द या बार-बार ऐंठन की समस्या हो सकती है.
पैरों में दर्द रहना
6 / 7लिवर की बीमारी ज्यादा बढ़ने पर पैरों में दर्द होने लगता है. इसलिए दर्द का कमजोरी समझकर नजरअंदाज ना करें. कई बार पैरों में दर्द होने की वजह से लिवर काफी हद तक इफेक्ट होने लगता है.
कब करानी चाहिए जांच?
7 / 7अगर पैरों में सूजन लंबे समय तक बनी रहे या उसके साथ लिवर से जुड़े दूसरे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं जैसे- लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट आदि कराने की जरूरत होती है. इसे भी पढ़ें- क्या एयर प्यूरीफायर फेफड़ों के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं? ऑन्कोलॉजिस्ट से जानिए कैसे मिल सकता है फायदा अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.