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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है, खासकर LPG गैस की सप्लाई और कीमतों पर. ऐसे में कई घरों ने इंडक्शन कुकर की तरफ रुख करना शुरू कर दिया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है- क्या इंडक्शन पर खाना बनाना जेब के लिए ज्यादा हल्का पड़ता है या नहीं? खासकर अगर घर में चार लोग हों, तो महीने भर का खर्च कितना बैठेगा, इसे में समझते हैं.
इंडक्शन कुकर की बिजली खपत कितनी होती है

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आम तौर पर इंडक्शन कुकर की पावर 1200W से 2000W के बीच होती है. इसका मतलब है कि यह एक घंटे में लगभग 1.2 से 2 यूनिट तक बिजली खर्च कर सकता है. अगर हम औसतन 1500W का इंडक्शन लें, तो यह हर घंटे करीब 1.5 यूनिट बिजली इस्तेमाल करेगा.
रोजाना इस्तेमाल का अनुमान

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चार लोगों के परिवार में दिन में दो से तीन बार खाना बनता है. ऐसे में इंडक्शन का इस्तेमाल औसतन 2 से 3 घंटे तक हो सकता है. अगर हम बीच का आंकड़ा लें, यानी करीब 2.5 घंटे रोज, तो रोजाना लगभग 3.5 से 4 यूनिट बिजली की खपत हो सकती है.
महीने भर की कुल खपत कितनी होगी?

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अगर हर दिन करीब 4 यूनिट बिजली खर्च होती है, तो 30 दिनों में यह आंकड़ा लगभग 120 यूनिट तक पहुंच जाता है. यानी पूरे महीने में इंडक्शन इस्तेमाल करने पर इतनी बिजली खपत होना सामान्य माना जा सकता है.
बिजली बिल का अनुमान

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देश में बिजली की दरें अलग-अलग जगहों पर अलग होती हैं, लेकिन औसतन 6 से 8 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से देखें तो 120 यूनिट पर खर्च करीब 700 से 1000 रुपये के बीच आता है. यानी महीने भर इंडक्शन पर खाना बनाने का कुल खर्च इसी रेंज में रह सकता है.
क्या LPG के मुकाबले सस्ता पड़ता है इंडक्शन

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अगर तुलना करें, तो कई शहरों में LPG सिलेंडर की कीमत 1000 रुपये के आसपास या उससे ज्यादा हो चुकी है. ऐसे में इंडक्शन पर खाना बनाना कई मामलों में सस्ता या बराबरी का विकल्प साबित हो सकता है, खासकर तब जब इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए.