बॉलीवुड का सबसे लंबा किसिंग सीन, जो चला था पूरे 4 मिनट, डायरेक्टर भी शर्मा गए, मगर एक्टर्स ने एक-दूसरे को नहीं छोड़ा
Longest Kissing Scene of Bollywood: बॉलीवुड में किसिंग सीन्स का दौर अभी नहीं शुरू हुआ है, इसकी पहल सबसे पहले 1933 की कर्मा फिल्म से हुई, जिसमें एक्टर्स के उस 4 मिनट के किसिंग सीन को बॉलीवुड का सबसे लंबा लिप-लॉक सीन माना जाता है.

Longest Kissing Scene of Bollywood: बॉलीवुड में किसिंग सीन्स का दौर अभी नहीं शुरू हुआ है, इसकी पहल सबसे पहले 1933 की कर्मा फिल्म से हुई, जिसमें एक्टर्स के उस 4 मिनट के किसिंग सीन को बॉलीवुड का सबसे लंबा लिप-लॉक सीन माना जाता है.
बॉलीवुड में किसिंग सीन्स
2 / 8बॉलीवुड में कई किसिंग सीन्स बड़े पर्दे पर शूट किए गए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के उस दौर में पूरे 4 मिनट का किसिंग सीन फिल्माया गया था, जो अब तक का सबसे लंबा लिप-लॉक सीन बन गया.
किस फिल्म का था ये किसिंग सीन?
3 / 8दरअसल, साल 1933 में कर्मा फिल्म बनाई गई, जिसमें मुख्य भूमिका में एक्ट्रेस देविका रानी और हिमांशू राय थे. वे दोनों असल जिंदगी में भी पति-पत्नी थे.
लंबा किसिंग सीन शूट हुआ
4 / 8असल जिंदगी में पति-पत्नी होने की वजह से उन्हें किसिंग सीन शूट करने में कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं हुई. बता दें कि फिल्म के निर्देशक जे. एल. फ्रीयर हंट थे.
किस्सों में बनाई गई घटना
5 / 8लोकप्रिय किस्सों के मुताबिक, उस दौर में रूढ़िवादी सोच के कारण इतने लंबे और इंटीमेट सीन को शूट करने समय सेट पर मौजूद लोग, जिनमें निर्देशक भी शामिल थे, थोड़े असहज जरूर हुए थे, लेकिन एक्टर्स अपनी कला में पूरी तरह डूबे रहे.
इस सीन के पीछे की वजह
6 / 8साल 1933 में इस लंबे किसिंग सीन को टीवी पर दिखाना इतना आसान नहीं था. इस सीन को शूट करने के पीछे कोई रोमांटिक वजह नहीं रखी गई. बल्कि हिमांशू राय के किरदार को सांप ने काटा, जिसकी वजह से देविका रानी ने उन्हें होश में लाने के लिए उनके होठों को चूमा.
बोल्ड सीन पर हुआ विवाद
7 / 8उस समय भारतीय सिनेमा में इतना बोल्ड सीन बड़े विवाद की जड़ बन गया. उस समय का समाज इतने बोल्ड सीन को नहीं सह पाया, जिसकी वजह से फिल्म को भारत में बैन कर दिया गया. लेकिन लंदन जैसे शहरों में काफी सराहना मिली.
बॉलीवुड का सबसे लंबा किसिंग सीन
8 / 8इस 4 मिनट के किसिंग सीन को आज भी बॉलीवुड का सबसे लंबा ऑन स्क्रीन किस माना जाता है. इस फिल्म ने 1933 के उस दौर में जमकर लोगों को आक्रोश झेला था. लेकिन आज के दौर में फिल्म को काफी सराहना मिलती है. कई लोगों का मानना है कि फिल्म अपने समय से काफी आगे के कॉन्सेप्ट पर काम कर रही थी.