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अमेरिका और ईरान के बीच जंग होने के हालात बने हुए हैं, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई धमकी दे चुके हैं कि ईरान अकेला जंग नहीं झेलेगा, बल्कि पूरा मिडिल ईस्ट खामियाजा भुगतेगा. अमेरिका ने अपना नौसैनिक बेड़ा तैनात करके ईरान पर परमाणु समझौते का दबाव डाला हुआ है. अमेरिका ने 5 टारगेट भी फाइनल कर लिए हैं, जो हमले से तबाह हुए तो ईरान घुटनों पर आ जाएगा और ईरान पर हमला करने के लिए अमेरिका जिन हथियारों का इस्तेमाल करेगा, वे काफी विनाशकारी हैं. उनमें से किसी का तोड़ ईरान के पास नहीं है.

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अमेरिका ने अपने शक्तिशाली, विनाशकारी और विशालकाय नौसैनिक बेड़े USS अब्राहम लिंकन को ईरान के पास समुद्र में तैनात किया हुआ है. अमेरिका का यह एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पूरी सेना के बराबर है. इस जंगी जहाज के साथ डेस्ट्रॉयर स्कवाड्रन 21 के जहाज चलते हैं. पूरे ग्रुप में एक सुपर कैरियर, 3 से 6 डेस्ट्रॉयर्स, 2 सबमरीन, 7000 से 8000 सैनिक, 65 से 70 F-35 फाइटर जेट, F/A-18 कैटेगरी के एयरक्राफ्ट हैं. वहीं इस पूरे ग्रुप के पास हजारों टोमाहॉक मिसाइलें और दूसरे हथियार हैं, जो ईरान के सैन्य ठिकानों, ऑयल प्लांट और न्यूक्लियर साइट्स पर हमला कर सकता है.

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अमेरिका का दूसरा खतरनाक हथियार B-2 स्पिरिट बॉम्बर है, जिससे अमेरिका ने जून 2025 में भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था और भारी तबाही मचाई थी. यह बॉम्बर देखने में फ्लाइंग विंग यानी एक पंख जैसा है, जिसकी पूंछ नहीं है, लेकिन अपने इस डिजाइल के कारण यह बॉम्बर आसमान में लंबे समय तक एक जगह पर स्थिर रह सकता है और इसके कोई रडार डिटेक्ट नहीं कर सकता. यह बॉम्बर रात के अंधेरे में भी हमला करने की क्षमता रखता है. यह बॉम्बर बिना रुके 11000 किलोमीटर तक सफर कर सकता है और अमेरिका से उड़कर किसी की महाद्वीप में घुसकर हमला कर सकता है. B-2 बॉम्बर से परमाणु हथियार भी दागे जा सकते हैं.

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अमेरिका के पास तीसरा खतरनाक हथियार GBU-57A/B मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर है, जो एक बंकर बस्टर बम है और यह हथियार सिर्फ अमेरिका के पास है. अमेरिका इसका इस्तेमाल ईरान की फोर्डो न्यूक्लियर साइट को ध्वस्त करने के लिए कर सकता है, क्योंकि वह प्लांट पहाड़ के अंदर करीब 300 फीट की गहराई में बना है. वहीं अली खामेनेई के सीक्रेट बंकर को भी इससे ध्वस्त किया जा सकता है. 13600 किलोग्राम वजनी यह बम 200 फीट (61 मीटर) की गहराई तक जमीन के अंदर घुसने में सक्षम है और जमीन के अंदर जाने के बाद बम खुद एक्टिवेट होता है और फट जाता है. यह बम B-2 बॉम्बर से गिराया जा सकता है और एक बॉम्बर 2 एक बार में 2 बम गिरा सकता है.

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अमेरिका के पास सबसे चौथा सबसे खतरनाक हथियार 5वीं पीढ़ी का F-35 फाइटर जेट हैं, जिसमें स्टेल्थ टेक्नोलॉजी है, यानी इसकी आवाज ऐसी है कि दुश्मन का रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं सकता. इसमें मॉडर्न सेंसर लगे हैं, जिसकी मदद से यह फाइटर जेट खुद पर होने वाले हमले को चंद सेकंड में पहचान कर पलटवार करता है. इस फाइटर जेट के हेलमेट पर ही डिस्प्ले सिस्टम लगा है, जिससे पायलट को बार-बार डैशबोर्ड नहीं देखना पड़ता.इसमें सबसे घातक एयर-टू-एयर मिसाइलें और एयर-टू-ग्राउंड विस्फोटक इंस्टॉल हैं.

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टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें वहीं मिसाइलें हैं, जिनकी डिमांड यूक्रेन भी कर रहा था, लेकिन अमेरिका ने दी नहीं. अमेरिका के पास 1000 मिसाइलें हैं, जो 2500 किलोमीटर की दूरी तक हमला कर सकता हैं. यह लंबी दूरी की कम ऊंचाई पर उड़ने वाली सबसोनिक क्रूज मिसाइल है. इस मिसाइल को नेवी शिप और सबमरीन से दाग सकते हैं. इस मिसाइल को रडार डिटेक्ट नहीं कर सकता और यह हमला करने के लिए GPS सिस्टम का इस्तेमाल करती है. किसी भी मौसम में इस मिसाइल से हमला किया जा सकता है वहीं यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है.