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जब भी किसी देश में भूकंप आता है तो उसका असर आस-पास के देशों पर भी साफ दिखाई देता है. भूकंप का आना सिर्फ जानमाली की हानि ही नहीं होती है बल्कि ये प्रकृति पर भी अपना असर डालता है. वहीं, कहा जाता है कि सांपों को जमीन के नीचे रहने की वजह से भूकंप आने का पता पहले ही चल जाता है. दुनिया में कुछ ऐसी भूकंप की घटनाएं दर्ज की गई जब हजारों सांप एक साथ भूकंप के आने से पहले ही बाहर निकल आए.

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जब भी किसी देश में भूकंप आता है तो उसका असर आस-पास के देशों पर भी साफ दिखाई देता है. भूकंप का आना सिर्फ जानमाली की हानि ही नहीं होती है बल्कि ये प्रकृति पर भी अपना असर डालता है. वहीं, कहा जाता है कि सांपों को जमीन के नीचे रहने की वजह से भूकंप आने का पता पहले ही चल जाता है. दुनिया में कुछ ऐसी भूकंप की घटनाएं दर्ज की गई जब हजारों सांप एक साथ भूकंप के आने से पहले ही बाहर निकल आए.

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सांप भूकंप से पहले ही हरकत में आ जाते हैं. कुछ रिपोर्ट्स और वैज्ञानिक ऑब्जर्वेशन से पता चलता है कि सांप भूकंप आने से पहले असामान्य व्यवहार करते हुए दिखते हैं. वो झुंड में अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं. अजीब तरीके से घूमते हैं या घबराए हुए से लगते हैं. कुछ सांप तो ठंड में भी बाहर आ जाते हैं जबकि आमतौर पर हाइबरनेशन में रहते हैं.

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सांपों को कैसे हो जाती है भूकंप की आहट?
सांप धरती के नीचे होने वाले छोटे- छोटे कंपन और विद्युत-चुंबकीय बदलावों को भी महसूस कर सकते हैं. कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि वे भूकंप से पहले होने वाली इन सूक्ष्म गतिविधियों को महसूस कर लेते हैं. जब भूकंप आता है तो ज्यादातर जानवरों की तरह सांप भी अपने बचाव के लिए किसी सुरक्षित जगह की ओर भागते हैं.

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जमीन से कितनी नीचे रहते हैं सांप?
अधिकांश सांप जमीन की सतह से 30 सेंटीमीटर से 1 मीटर की गहराई तक बिलों या फिर दरारों में रहते हैं, खासकर गर्मियों या फिर ठंड से बचने के लिए वह ज्यादातर जमीन के नीचे ही रहते हैं. हाइबरनेशन के दौरान यानि सर्दियों में किंग कोबरा या रैटलस्नेक ठंडी जगहों पर 1.5 से 3 मीटर (5 से 10 फीट) गहराई तक भी छिप सकते हैं. इसे हाइबरकुलम कहते हैं, एक सुरक्षित जगह जहां वे मौसम के खराब दौर में भी रहते हैं.
वहीं, कई शोध से ये भी पता चलता है कि सांप और अन्य जानवर भूकंप से पहले की सूक्ष्म गतिविधियों को महसूस कर सकते हैं. वहीं, इससे प्रेरित होकर कुछ देशों ने जानवर-आधारित चेतावनी सिस्टम विकसित करने की भी कोशिश की.

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दुनिया में कई ऐसे भूकंप दर्ज किए गए कि उसके आने से पहले ही बहुत सारे सांप अचानक बाहर निकल आए. इन घटनाओं ने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों को हैरान किया. क्योंकि सांप आमतौर पर गुप्त और छिपकर रहने वाले जीव होते हैं. ठंड में तो वो धरती में नीचे बिल बनाकर दुबक जाते हैं.

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भूकंप से पहले ही सांपों का झुंड निकला बाहर
चीन के टांगशान प्रांत के युशान में 1976 में जबरदस्त भूकंप आया था. दिन था 28 जुलाई 1976. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.6 थी. इसमें दो लाख 40 हजारों लोगों की जान गई थी. लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि भूकंप से ठीक एक दिन पहले ही सांपों के झुंड के झुंड बाहर निकलते देखे गए. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जानवर (सांप, मछलियाँ, कुत्ते) सभी अजीब व्यवहार कर रहे थे. इस घटना ने चीन को “जानवरों से पूर्व चेतावनी प्रणाली” पर शोध करने के लिए प्रेरित किया.

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वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सांप और अन्य सरीसृप पृथ्वी की प्लेटों में कंपन, विद्युत-चुंबकीय तरंगों और गैस उत्सर्जन को पहले ही महसूस कर लेते हैं. इसी वजह से वे भूकंप से पहले या उसके दौरान जमीन के नीचे से बाहर आ जाते हैं.
वैसे भूकंप के समय ज़्यादातर सांप धरती से इसलिए बाहर निकल आते हैं कि उन्हें समझ में ही नहीं आ पाता कि हो क्या रहा है. वे स्थिर रहते हैं या किसी दरार या गड्ढे में घुस जाते हैं. लिहाजा भूकंप के मलबों में अक्सर सांप छिपे मिल सकते हैं.