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Delhi Katra Expressway: देश का 5वां सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे दिल्ली-अमृतसर-कटरा मार्च 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही दिल्ली और कटरा के बीच का समय 6 घंटे का रह जाएगा। यह एक्सप्रेसवे अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब और कटरा के माता वैष्णो देवी मंदिर को जोड़ता है।

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नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारी ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे बॉर्डर तक सैन्य आवाजाही में भी मददगार साबित होगी। अप्रैल 2021 में शुरू हुए एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य में ऑपरेशन सिंदूर और भारी बारिश-बाढ़ के कारण काफी देरी हुई थी, लेकिन अब निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है।

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अधिकारी ने बताया कि प्रोजेक्ट पूरा होने से जहां रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, वहीं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली से कटरा के बीच की दूरी 727 किलोमीटर से घटकर 588 किलोमीटर हो जाएगी, जिससे यात्रा का समय 14 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा। एक्सप्रेसवे के पूरा होने की समय सीमा मार्च 2027 तय की गई है।

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दिल्ली कटरा एक्सप्रेसवे देश के 2 सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों को एक दूसरे से जोड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे के जरिए लोग पंजाब के अमृतसर में स्थित श्री हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर या दरबार साहिब में अरदास करने के बाद जम्मू कश्मीर के रियासी जिले के कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए भी जा सकते हैं।

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माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन अभी तक वे वैष्णो देवी यात्रा के लिए रेल और हवाई यात्रा पर ही निर्भर रहते हैं। एक्सप्रेसवे के रूप में उन्हें तीसरा विकल्प भी मिल जाएगा। हालांकि पिछले साल इसके निर्माण कार्य में चुनौतियां आई, लेकिन NHAI ने उन चुनौतियों से पार पा लिया है।

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दिल्ली कटरा एक्सप्रसेवे के निर्माण कार्य में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक तनावपूर्ण माहौल के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर कर्मचारियों को बनाए रखना था। कई कर्मचारी काम छोड़कर चले गए और उन्हें वापस लौटने के लिए मनाना पड़ा। इसके अलावा भारी बारिश के कारण 2 निर्माणाधीन पुल बह गए, जिससे आपूर्ति लाइनें बुरी तरह बाधित हुई थीं।

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एक्सप्रेसवे का निर्माण एडवांस्ड सेगमेंटल ब्रिज कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने बनाया जा रहा है। इस टेक्निक से दिल्ली मेट्रो और द्वारका एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य किया गया था, लेकिन जम्मू-सांबा के बीच 21.5 किलोमीटर ऊंचा कॉरिडोर भारी यातायात के कारण चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब इस चुनौती को भी पार कर लिया गया है।