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चीन की अदालत ने म्यांमार के कुख्यात मिंग परिवार के 11 सदस्यों को फांसी की सजा पूरी कर दी. वेनझोउ कोर्ट ने सितंबर में सुनाई गई मौत की सजा को गुरुवार को अंजाम दिया, जिसमें हत्या, मारपीट, अवैध हिरासत, धोखाधड़ी और जुआ जैसे अपराध शामिल थे.

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इस गैंग ने कम से कम 14 चीनी नागरिकों की हत्या की और सैकड़ों को अपंग बना दिया, जो अंतरराष्ट्रीय अपराध की एक मिसाल है. मिंग परिवार का रैकेट म्यांमार के लाउकैंग इलाके में सक्रिय था, जहां रोमांस स्कैम से लेकर क्रिप्टो लूट तक का खेल चलता.

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इंटरनेट पर फर्जी प्रेम जाल बुनकर लोगों को फंसाते, फिर नौकरी का लालच देकर बंधक बनाते. इन स्कैम सेंटर्स को 'टॉर्चर सेंटर' कहा जाता, जहां इनकार करने वालों को बेरहमी से सताया जाता था.

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इस माफिया का सरगना चेन झी लंदन में फिजूलखर्ची कर रहा था, जहां एवेन्यू रोड पर 120 करोड़ की हवेली और फेंचर्च स्ट्रीट पर 100 मिलियन यूरो की संपत्तियां थीं. ब्रिटिश सरकार ने इन सभी को जब्त कर 'गंदे पैसे' को साफ किया. चीन की कार्रवाई ने ऐसे अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है.

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भारतीय भी इन स्कैम्स के प्रमुख शिकार बन चुके हैं, खासकर म्यांमार और कंबोडिया के सेंटर्स से. 'डिजिटल अरेस्ट' और मनी लॉन्ड्रिंग के अधिकांश केस इन्हीं से जुड़े हैं. नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड ले जाकर पासपोर्ट छीन लिया जाता, फिर 'पिग बर्चरिंग' स्कैम्स में झोंक दिया जाता.

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भारत सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिए हैं. नवंबर 2025 में वायुसेना के विमानों ने थाईलैंड रूट से 270 भारतीयों को KK पार्क जैसे केंद्रों से निकाला. मार्च 2025 में 549 को सीमा से बचाया गया. ये युवा हिंदी-अंग्रेजी बोलने के कारण निशाने पर हैं.

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म्यांमार के इन स्कैम सेंटर्स में फंसे लोग बिजली के झटकों से लेकर यातनाओं का शिकार होते. गैंग अब भारतीय बाजार को लूटने के लिए भाषा का इस्तेमाल कर रहा. सरकार ने चेतावनी जारी की है कि संदिग्ध जॉब ऑफर से सावधान रहें.

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चीन की फांसी ने वैश्विक स्तर पर ऐसे नेटवर्क पर ब्रेक लगाया है. भारत को भी साइबर अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना होगा. मिंग परिवार का अंत एक सबक है कि मानव तस्करी और डिजिटल ठगी बर्दाश्त नहीं.