क्या गर्मियों में कार का टैंक फुल करवाने से लग सकती है आग? जानिए कितना सच है ये डर

गर्मियों में अक्सर लोग डर के कारण कार की टंकी फुल नहीं करवाते. कई लोगों को लगता है कि तेज गर्मी में फुल टैंक होने से आग लग सकती है या टंकी फट सकती है. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? जानिए इसके पीछे की पूरी सच्चाई और क्यों एक्सपर्ट्स ओवरफिलिंग से बचने की सलाह देते हैं.

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गर्मी शुरू होते ही अक्सर यह दावा सुनने को मिलता है कि कार की पेट्रोल टंकी पूरी भरवाना खतरनाक हो सकता है. कई लोग मानते हैं कि तेज गर्मी में फुल टैंक होने से आग लगने या टंकी फटने का खतरा बढ़ जाता है. इसी डर की वजह से कुछ लोग आधी टंकी ही भरवाते हैं.

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क्या सच में फुल टैंक से बढ़ता है खतरा?

क्या सच में फुल टैंक से बढ़ता है खतरा?2 / 6

असल में इस तरह के दावों में ज्यादा सच्चाई नहीं मानी जाती. आजकल कार कंपनियां फ्यूल टैंक को इस तरह डिजाइन करती हैं कि वे ज्यादा तापमान और प्रेशर को आसानी से संभाल सकें. इंडियन ऑयल के मुताबिक भी गाड़ियों के फ्यूल टैंक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं. इसलिए तय सीमा तक पेट्रोल या डीजल भरवाना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है.

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 गर्मी से क्यों नहीं फटती पेट्रोल टंकी?

 गर्मी से क्यों नहीं फटती पेट्रोल टंकी?3 / 6

पेट्रोल और डीजल का ऑटो-इग्निशन टेम्प्रेचर काफी ज्यादा होता है. यानी बिना चिंगारी के इनमें आग लगने के लिए बहुत अधिक तापमान चाहिए होता है. सामान्य गर्मियों की गर्मी उस स्तर तक नहीं पहुंचती. यही वजह है कि केवल धूप या मौसम की गर्मी की वजह से फुल टैंक वाली कार में विस्फोट होने की संभावना बेहद कम होती है.

फिर टंकी ओवरफिल क्यों नहीं करनी चाहिए?

फिर टंकी ओवरफिल क्यों नहीं करनी चाहिए?4 / 6

हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऑटो-कट होने के बाद बार-बार अतिरिक्त पेट्रोल भरवाने से बचना चाहिए. नई कारों में EVAP यानी Evaporative Emission Control System दिया जाता है, जो फ्यूल वेपर को कंट्रोल करता है. जरूरत से ज्यादा पेट्रोल भरने पर यह सिस्टम प्रभावित हो सकता है और फ्यूल वेपर मैनेजमेंट में दिक्कत आ सकती है. ये भी पढ़ें- कहीं आपको तो नहीं लग रहा पेट्रोल पंप पर चूना! बढ़ती कीमतों के बीच फ्रॉड से कैसे बचें

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ऑटो-कट के बाद पेट्रोल भरवाना पड़ सकता है भारी

ऑटो-कट के बाद पेट्रोल भरवाना पड़ सकता है भारी5 / 6

जानकारों के मुताबिक पेट्रोल पंप पर नोजल ऑटो-कट होने के बाद अतिरिक्त फ्यूल नहीं भरवाना चाहिए. ऐसा करने से टैंक में फ्यूल एक्सपैंशन के लिए जरूरी जगह कम हो जाती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि फुल टैंक करवाना गलत है. सामान्य तरीके से टंकी फुल करवाना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है.

बहुत कम फ्यूल में गाड़ी चलाना भी सही नहीं

बहुत कम फ्यूल में गाड़ी चलाना भी सही नहीं6 / 6

सिर्फ ओवरफिलिंग ही नहीं, बल्कि बहुत कम फ्यूल लेवल पर लगातार कार चलाना भी नुकसानदायक हो सकता है. इससे फ्यूल पंप पर असर पड़ सकता है और टैंक में जमा गंदगी फ्यूल सिस्टम तक पहुंच सकती है. इसलिए कई लोग सलाह देते हैं कि टंकी पूरी खाली होने से पहले ही कार में फ्यूल भरवा लेना बेहतर रहता है. ये भी पढ़ें- गर्मियों में क्यों फट जाते हैं कार और बाइक के टायर? ड्राइवर जरूर जान लें ये बातें

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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