क्या काले रंग की कारों का एक्सीडेंट ज्यादा होता है, क्या रंग बढ़ा सकते हैं हादसे का खतरा? जानिए कितनी सच है ये बात

अगर आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं और ब्लैक कलर आपकी पहली पसंद है, तो यह खबर आपके लिए है. कुछ रिसर्च में दावा किया गया है कि काले रंग की कारों में दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है. जानिए सड़क सुरक्षा के लिहाज से कौन-से रंग सबसे बेहतर माने जाते हैं और क्यों कार का रंग आपकी सुरक्षा पर असर डाल सकता है.

Cars color
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नई कार खरीदते समय लोग आमतौर पर उसके डिजाइन, फीचर्स और पसंदीदा रंग पर ज्यादा ध्यान देते हैं. ब्लैक कलर की कारें खासतौर पर काफी लोकप्रिय होती हैं क्योंकि वे स्टाइलिश और प्रीमियम दिखाई देती हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कार का रंग सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा हो सकता है. कुछ रिसर्च में यह बात सामने आई है कि काले रंग की कारें कुछ परिस्थितियों में कम दिखाई देती हैं, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है.

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सड़क पर विजिबिलिटी क्यों होती है जरूरी?

सड़क पर विजिबिलिटी क्यों होती है जरूरी?2 / 9

सड़क सुरक्षा एक्सपर्टस के मुताबिक किसी भी वाहन का साफ और जल्दी दिखाई देना बेहद महत्वपूर्ण होता है. जब कोई वाहन दूर से आसानी से नजर आ जाता है, तो दूसरे ड्राइवरों को समय रहते प्रतिक्रिया देने का मौका मिल जाता है. यही वजह है कि कार का रंग केवल खूबसूरती ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जाता है.

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काली कारें कम दिखाई क्यों देती हैं?

काली कारें कम दिखाई क्यों देती हैं?3 / 9

ब्लैक कलर की कारों के कम दिखाई देने की मुख्य वजह रोशनी से जुड़ी है. काला रंग प्रकाश को परावर्तित करने की बजाय अधिक मात्रा में सोख लेता है. ऐसे में कम रोशनी, धुंध, बारिश या रात के समय काली कारें आसपास के वातावरण में घुल-मिल जाती हैं, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है. ये भी पढ़ें- कार स्टार्ट करते ही क्यों नहीं देनी चाहिए रेस? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती

हल्के रंग की कारों को मिलता है फायदा

हल्के रंग की कारों को मिलता है फायदा4 / 9

सफेद, पीले और अन्य हल्के रंगों की कारें रोशनी को ज्यादा परावर्तित करती हैं. इसी कारण ये वाहन दूर से भी आसानी से नजर आ जाते हैं. सड़क पर उनकी मौजूदगी जल्दी समझ में आती है, जिससे अन्य वाहन चालकों को पर्याप्त प्रतिक्रिया समय मिल सकता है. ये भी पढ़ें- कार का AC साल में कितनी बार सर्विस कराना चाहिए? ज्यादातर लोग करते हैं बड़ी गलती

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रात के समय और बढ़ जाती है परेशानी

रात के समय और बढ़ जाती है परेशानी5 / 9

रात में काले रंग की कारों की विजिबिलिटी और भी कम हो सकती है. खासकर उन जगहों पर जहां स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था कमजोर हो. ऐसे हालात में दूसरे ड्राइवरों के लिए वाहन को समय रहते देख पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है.

कुछ सेकंड भी बचा सकते हैं जान

कुछ सेकंड भी बचा सकते हैं जान6 / 9

सड़क पर कई बार दुर्घटना से बचने के लिए कुछ सेकंड का अतिरिक्त समय ही काफी होता है. यदि सामने मौजूद वाहन देर से दिखाई देता है, तो ड्राइवर के पास ब्रेक लगाने या गाड़ी की दिशा बदलने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचता. यही कारण है कि बेहतर विजिबिलिटी को सड़क सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है.

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कौन-से रंग माने जाते हैं सबसे सुरक्षित?

कौन-से रंग माने जाते हैं सबसे सुरक्षित?7 / 9

विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद, पीला, नारंगी और गोल्ड जैसे चमकीले रंग सुरक्षा के लिहाज से बेहतर विकल्प माने जाते हैं. ये रंग लगभग हर मौसम और रोशनी की स्थिति में आसानी से दिखाई देते हैं, जिससे सड़क पर वाहन की पहचान जल्दी हो जाती है.

सिर्फ काला ही नहीं, ये रंग भी हो सकते हैं चुनौती

सिर्फ काला ही नहीं, ये रंग भी हो सकते हैं चुनौती8 / 9

केवल ब्लैक कलर ही नहीं, बल्कि ग्रे और सिल्वर रंग की कारें भी कुछ परिस्थितियों में कम दिखाई दे सकती हैं. इन रंगों का मेल कई बार सड़क, धुंध या बादलों के रंग से हो जाता है, जिससे वाहन की विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है.

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कार खरीदते समय इस पहलू को भी नजरअंदाज न करें

कार खरीदते समय इस पहलू को भी नजरअंदाज न करें9 / 9

हालांकि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई कारण होते हैं और केवल कार का रंग ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं होता. फिर भी बेहतर विजिबिलिटी सड़क सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसलिए नई कार खरीदते समय केवल लुक्स और पसंद ही नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े इस पहलू पर भी जरूर विचार करना चाहिए. (Images Credit- Magnigic/Pexels/Unsplash)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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