बाइक के शॉकर कितने साल चलते हैं, कब बदलने चाहिए और कितना आता है खर्च? जानिए सबकुछ

क्या आपकी बाइक पहले जैसी स्मूद नहीं चल रही? ये संकेत हो सकते हैं कि आपकी बाइक के शॉकर खराब होने लगे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाइक के शॉकर की उम्र कितनी होती है और किन वजहों से ये जल्दी खराब हो जाते हैं? जानिए सस्पेंशन सिस्टम की पूरी कहानी, खराब होने के संकेत और इसे लंबे समय तक सही रखने के आसान टिप्स.

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अगर बाइक चलाते समय छोटे-छोटे गड्ढों का झटका सीधे शरीर तक महसूस होने लगे, मोड़ पर बाइक अस्थिर लगे या ब्रेक लगाने पर कंट्रोल कम महसूस हो, तो यह सस्पेंशन सिस्टम में समस्या का संकेत हो सकता है. बाइक का शॉकर आरामदायक और सुरक्षित राइड के लिए बेहद जरूरी पार्ट होता है.

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बाइक में शॉकर का क्या काम होता है?

बाइक में शॉकर का क्या काम होता है?2 / 8

बाइक के शॉकर सड़क के गड्ढों, स्पीड ब्रेकर और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से आने वाले झटकों को कम करने का काम करते हैं. साथ ही यह टायर और सड़क के बीच बेहतर संपर्क बनाए रखते हैं, जिससे ग्रिप, ब्रेकिंग और हैंडलिंग बेहतर बनी रहती है. जब शॉकर सही तरीके से काम नहीं करते, तो बाइक जरूरत से ज्यादा उछलने लगती है. इससे राइडिंग कम्फर्ट कम हो जाता है और बाइक का कंट्रोल भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है.

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शॉकर की औसत लाइफ कितनी होती है?

शॉकर की औसत लाइफ कितनी होती है?3 / 8

ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाइक के शॉकर सामान्य रूप से 50,000 से 1 लाख किलोमीटर तक चल सकते हैं. वहीं समय के हिसाब से उनकी औसत उम्र लगभग 4 से 5 साल मानी जाती है. शॉकर कितने समय तक चलेंगे, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि बाइक किन रास्तों पर चलाई जाती है. अच्छी सड़कों पर इस्तेमाल होने वाली बाइक के शॉकर 8 से 10 साल तक भी टिक सकते हैं, जबकि खराब और गड्ढों वाली सड़कों पर उनकी उम्र काफी कम हो सकती है. ये भी पढ़ें- मसाज सीट, OLED डिस्प्ले और 12 स्पीकर सिस्टम; भारत में इतने में लॉन्च हुई नई MINI Countryman C

किन कारणों से जल्दी खराब होते हैं शॉकर?

किन कारणों से जल्दी खराब होते हैं शॉकर?4 / 8

खराब सड़कें, ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, रफ ड्राइविंग और मौसम का असर शॉकर को जल्दी खराब कर सकता है. ज्यादा गर्मी और नमी भी शॉकर की सील और उसके अंदर मौजूद ऑयल को प्रभावित कर सकती है. ये भी पढ़ें- कार इंश्योरेंस है फिर भी नहीं मिलेगा क्लेम! ये 7 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

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कब करानी चाहिए शॉकर की जांच?

कब करानी चाहिए शॉकर की जांच?5 / 8

ऑटो एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बाइक की नियमित सर्विस के समय सस्पेंशन सिस्टम की भी जांच करानी चाहिए. इससे शुरुआती समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है और बड़े खर्च से बचा जा सकता है. अगर आपकी बाइक 50,000 किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है या फिर गड्ढों और खराब रास्तों पर पहले की तुलना में ज्यादा झटके महसूस हो रहे हैं, तो शॉकर की स्थिति जरूर चेक करानी चाहिए.

शॉकर की लाइफ बढ़ाने के आसान तरीके

शॉकर की लाइफ बढ़ाने के आसान तरीके6 / 8

सस्पेंशन की उम्र बढ़ाने के लिए खराब रास्तों पर बाइक को धीमी गति से चलाना चाहिए. इसके अलावा बाइक पर जरूरत से ज्यादा वजन नहीं रखना चाहिए और नियमित सर्विसिंग कराते रहना चाहिए. ये भी पढ़ें- स्पार्क प्लग कितने किलोमीटर तक चलता है, इसे कब बदलना चाहिए? जानें कैसे करते हैं इसकी सफाई

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इन संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें

इन संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें7 / 8

अगर शॉकर से ऑयल लीकेज हो रहा है या बाइक से असामान्य आवाजें आ रही हैं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते जांच कराने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.

शॉकर बदलने में कितना खर्च आता है?

शॉकर बदलने में कितना खर्च आता है?8 / 8

शॉकर बदलने की लागत बाइक और उसके मॉडल के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. आमतौर पर एक शॉकर बदलने में कुछ हजार रुपये तक का खर्च आ सकता है. प्रीमियम और स्पोर्ट्स बाइक में इस्तेमाल होने वाले एडवांस सस्पेंशन सिस्टम की कीमत ज्यादा होती है. इसलिए ऐसी बाइक्स में शॉकर बदलने का खर्च सामान्य बाइक्स की तुलना में अधिक हो सकता है. (IMages Credit- unsplash/pexels)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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