हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CycloneTiger ShroffGyanesh KumarBigg Boss 20

बाटलीवाला, सोडावाला, दारूवाला… भारत में पारसियों के क्यों होते हैं अनोखे सरनेम? 200 साल पुराना है कनेक्शन 

Unique Surnames:  बाटलीवाला, सोडावाला, दारूवाला, पूनावाला या छोलेवाला जैसे नाम  अपने अंदर काफी कुछ समेटे हुए हैं. इनका इतिहास काफी पुराना है, जिनका इतिहास पारसी परिवारों से जुड़ा हुआ है. अगर आपको इनका इतिहास नहीं पता तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है. 

विज्ञापन
पेशे से जुड़े दारूवाला और ऐसे कई नाम. Image Credit- Gemini

मार्केट में शॉपिंग करते वक्त यकीनन आप भी बाटलीवाला, सोडावाला, छोलेवाला, दुकानवाला जैसे नाम सुनते होंगे. ये तमाम नाम ऐसी ही नहीं कह दिए गए, क्योंकि इनका भी एक इतिहास रहा है. इसे पारसी ग्रुप से जोड़ा जाता है, क्योंकि कुछ सरनेम ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही इनके पीछे की कहानी जानने में अलग ही मजा आता है. हालांकि, भारत में अलग-अलग समुदायों के सरनेम हैं, जिनकी अपनी अलग पहचान है. बाटलीवाला, सोडावाला, दारूवाला, पूनावाला और वर्किंग बॉक्सवाला जैसे सरनेम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं. इन नामों की खासियत सिर्फ उनका अलग होना नहीं है, बल्कि इनके पीछे पेशे, जगह और यहां तक कि पुराने निकनेम से जुड़ी कहानियां भी मिलती हैं. ये कहानियां क्या हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

पहले पारसियों में नहीं था सरनेम रखने का चलन

पुजारी बहमन कैकुबाद की लिखी 16वीं सदी की फारसी कविता ‘किस्सा-ए-संजान’ के मुताबिक, पारसी समुदाय में पहले सरनेम रखने की परंपरा नहीं थी, यह परंपरा 7वीं शताब्दी में फारस यानी आज के ईरान में अरब-इस्लामिक शासन आने के बाद से आई. कहा जाता है कि उन दौरान कई जोरास्ट्रियन भारत की ओर आए और गुजरात में बस गए. वक्त के साथ पारसियों की बोलचाल और संस्कृति को अपनाया, लेकिन अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखी. 

1800 के दशक में ब्रिटिश शासन का रहा हिस्सा 

पहले तो लोग एक-दूसरे की पहचान पहले नाम से ही करते थे, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान हुए भारतीय जनगणना में लोगों के लिए सरनेम दर्ज किए गए. ऐसे में पारसी परिवारों ने अपनी पहचान के लिए अलग-अलग आधारों पर सरनेम अपनाने शुरू किए. इसके बाद से ही यह परंपरा शुरू हुई और लोगों के नाम के आगे इस तरह के सरनेम दिखाई देने लगे. 

विज्ञापन

इसे भी पढ़ें- साथ होते हुए भी आपके साथ नहीं है पार्टनर, कहीं आप भी फबिंग के शिकार तो नहीं

पेशे से जुड़े दारूवाला और ऐसे कई नाम

खास बात यह है कि लोगों के नाम उनके पेशे के आधार पर रखे जाने लगे जैसे अगर कोई दारू बेचता है तो उसे दारूवाला कहा जाने लगा. इसी तरह अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों के नाम भी उनकी रोजी-रोटी के आधार पर पहचाने जाने लगे. हालांकि, हर पेशे या व्यापार करने वालों का इस तरह का सरनेम रखना जरूरी नहीं माना गया. 

विज्ञापन

जगह से भी बनने लगे सरनेम 

पुणे में रहने वालों से पूनावाला बना यानी कुछ पारसी सरनेम पेशे के बजाय जगह से जुड़े जाने लगे. पुणे में रहने वाले कुछ पारसी परिवारों ने अपनी पहचान के लिए पूनावाला नाम अपनाया. यानी यह सरनेम उनके पूर्वजों के रहने की जगह से जोड़ा गया. ऐसे ही ईरान में रहने वालों को ईरानी और दिल्ली में रहने वालों को दिल्लीवाले कहा गया.

इसे भी पढ़ें- Teachers Day 2026: इस बार सिर्फ कार्ड नहीं, टीचर के लिए प्लान करें ये खास सरप्राइज, यादगार बन जाएगा दिन

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola