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सोने के लिए सुननी पड़ती हैं बातें? कहीं आप भी Sleep Shaming के शिकार तो नहीं, जानिए क्या है स्लीप शेमिंग

Sleep Shaming: स्लीप शेमिंग एक नहीं बल्कि कई दिक्कतों की वजह बन सकती है. ऐसे में यहां जानिए स्लीप शेमिंग को कैसे पहचानें, इसके क्या नुकसान हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है.

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स्लीप शेम का मतलब क्या है?

What Is Sleep Shaming: “कितना सो रहे हो”, “हर समय सोते ही रहते हो”, “सूरज निकल आया लेकिन तुम नहीं उठे”, “दोपहर में भी कोई सोता है”, जैसी बातें असल में स्लीप शेमिंग कहलाती हैं. इन बातों का सीधा सा मतलब है कि सोने वाले व्यक्ति को सोने से मना किया जाए या शर्मिंदा किया जाए कि इतना सो क्यों रहे हो. लेकिन, स्लीप शेमिंग असल में ताना भर नहीं है बल्कि यह एक बड़ी परेशानी की तरफ हम सभी को खींच रहा है. स्लीप शेमिंग नींद की कमी (Sleep Deprivation) का कारण बनती जा रही है. इससे व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार नींद नहीं ले पाता और दिनभर नींद की कमी से जूझता है. हर दिन होने वाली यह नींद की कमी बड़ी दिक्कतों की वजह बन सकती है.

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क्या आप भी स्लीप शेमिंग का शिकार हो रहे हैं?

  • अगर आपको भी सोने के लिए ताना सुनना पड़ता है या कहा जाता है कि तुम बस सोते ही रहते हो
  • कोई आपके सामने बढ़ाई करता है कि वह तो दिन में सिर्फ 4 ये 5 घंटे ही सोता है
  • आप पर सोशल प्रेशर बनाना, आपकी नींद डिस्टर्ब हो इसका ख्याल किए बिना फैमिली प्लांस, दोस्तों के साथ प्लान या वीकेंड का कोई प्लान बना लेना
  • आपको गिल्ट में डालना कि आप ज्यादा सोते हो
  • आपकी नींद खुल जाए इसके लिए दरवाजा तेजी से बंद करना, लाइट या फैन बंद कर देना

ये सभी बातें अगर आपके साथ भी होती हैं तो हां, आप स्लीप शेमिंग का शिकार हो रहे हैं.

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मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है

  • स्लीप शेमिंग के कारण व्यक्ति पूरी नींद नहीं ले पाता और उसका तनाव बढ़ता है
  • नींद की कमी शरीर की रोद प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को कम (Weak Immunity) करने लगती है
  • पूरी नींद ना लेने के कारण मानसिक दिक्कतें हो सकती हैं, डिप्रेशन या एंजाइटी होने लगती है
  • फोकस में कमी आने लगती है.

स्लीप शेमिंग से कैसे बचें

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स्लीप शेमिंग से बचने के लिए अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक और नींद की जरूरत को समझना जरूरी है. किसी के लिए 6 घंटे की नींद काफी हो सकती है लेकिन अगर आपको 8 घंटों की नींद चाहिए तो 8 घंटों की नींद ही लें. अपनी नींद को अपनी प्रायोरिटी बना लें. नींद पूरी रहेगी तो शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी और आप अपने हर काम को बेहतर फोकस के साथ कर सकेंगे.

इस बात का ध्यान रखें कि आपको अपनी लाइफ में बाउंड्री तय करनी होगी. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी आपको नींद लेने के लिए शर्मिंदगी महसूस ना करवाए. आपको अपनी नींद पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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