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मौसम बदलते ही छाने लगी है उदासी? कहीं मानसून ब्लूज के शिकार तो नहीं हो गए आप

Monsoon Blues Meaning: मानसून आते ही मूड भी बदलने लगा है और उदासी छा रही है तो यहां जानिए किस तरह इन मानसून ब्लूज से छुटकारा पाया जा सकता है. डॉक्टर के बताए बेहद सिंपल टिप्स आपके काम आएंगे.

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मानसून ब्लूज क्या है, जानिए यहां.

What Is Monsoon Blues: आपने कभी मानसून ब्लूज के बारे में सुना है? अगर आप भी हर समय उदासी और आलस महसूस करने लगे हैं और पूरे दिन बस नींद आती रहती है और कोई काम करने का मन नहीं करता है तो हो सकता है आप मानसून ब्लूज का शिकार हो गए हैं. डॉ. शालिनी सिंह सालुंके ने अपने इंस्टग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि मानसून ब्लूज से बचने के लिए क्या करना चाहिए. यहां जानिए किस तरह मानसून ब्लूज को हैंडल किया जा सकता है और मूड लिफ्ट हो सकता है.

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मानसून ब्लूज से कैसे निकलें

बारिश के मौसम में धूप ना मिलने से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और मूड हार्मोन्स प्रभावित होते हैं. ऐसे में अपनी खोई एनर्जी और मुस्कान वापस लाने के लिए इन 5 टिप्स को फॉलो किया जा सकता है –

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20 मिनट नेचुरल लाइट – डॉक्टर सलाह देती हैं कि चाहे आपको सुबह धूप मिले या ना मिले लेकिन आपको 20 से 30 मिनट नेचुरल लाइट (Natural Light) में जरूर बैठना चाहिए.

आधा घंटा एक्सरसाइज – नाश्ता करने से पहले कम से कम 20 से 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज जरूर करें. इससे हैप्पी हार्मोन्स रिलीज होते हैं.

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प्रोटीन और मैग्नीशियम – अपने खानपान में प्रोटीन और मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स को शामिल करें. दाल, पनीर, सीड्स, डार्क चॉक्लेट और नट्स इनके अच्छे स्त्रोत होते हैं.

पूरी नीदं लेना – रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है. साथ ही, एक ही समय पर सोएं और एक ही समय पर उठें. इसका सेहत पर कई गुना ज्यादा अच्छा असर पड़ता है.

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परिवार और दोस्तों को समय देना – मानसून ब्लूज से बचना है तो अपनी परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं. मूड अपनेआप बेहतर हो जाता है.

मानसून ब्लूज होने का क्या कारण है

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  • मानसून के मौसम में उदासी (Sadness) महसूस करने का एक बड़ा कारण है धूप की कमी होना. लगातार बादल छाए रहने से धूप नहीं मिलती और धूप की कमी से सेरोटोनिन नाम का हैप्पी हार्मोन नहीं बन पाता जिससे मूड स्विंग्स होने लगते हैं और उदासी बढ़ती है.
  • धूप की कमी से इस मौसम में मेलाटोनिन हार्मोन ज्यादा बनने लगता है जिससे नींद ज्यादा आती है. इसीलिए व्यक्ति को हर समय नींद आने लगती है और आलस छा जाता है.
  • इस मौसम में फिजिकल एक्टिविटी की कमी होना भी एक बड़ा कारण है कि मन में घबराहट या अकेलेपन की भावना छा जाती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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