आज के समय में महिलाओं की सेहत और मेंटल हेल्थ को लेकर पहले से ज्यादा खुलकर चर्चा होने लगी है. इन्हीं चर्चाओं के बीच एक नया शब्द तेजी से सामने आया है-'मेनो-डिवोर्स’. मेनोपॉज या प्री-मेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाएं अपनी मैरिड लाइफ का दोबारा आकलन करने लगती हैं और जरूरत पड़ने पर अलग होने का फैसला भी कर सकती हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि मेनोपॉज अपने आप तलाक की वजह बन जाता है.
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क्या होता है मेनो-डिवोर्स?
मेनो-डिवोर्स कोई मेडिकल बीमारी या आधिकारिक निदान नहीं है, बल्कि ये एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक ट्रेंड को दर्शाने वाला शब्द है. इसका इस्तेमाल उन मामलों के लिए किया जाता है, जब 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज से गुजर रही महिलाएं अपने रिश्तों, भविष्य और निजी खुशियों के बारे में गंभीरता से सोचने लगती हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन में बदलाव आते हैं, जिनका असर मूड, नींद, तनाव, धैर्य और यौन इच्छा पर पड़ सकता है. लेकिन सिर्फ हार्मोन किसी मजबूत रिश्ते को नहीं तोड़ते. अगर रिश्ते में पहले से संवाद की कमी, तनाव या भावनात्मक दूरी मौजूद हो तो ये समय उन समस्याओं को और साफ कर सकता है.
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महिलाएं क्यों करती हैं रिश्तों पर विचार?
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई महिलाएं सालों तक परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों को तवज्जो देती हैं. जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और जिम्मेदारियां कम होने लगती हैं, तब वो खुद से सवाल करती हैं कि क्या वो अपनी आगे की जिंदगी उसी रिश्ते में बिताना चाहती हैं या बदलाव की जरूरत है. ऐसे समय में आत्मसम्मान, मानसिक शांति और व्यक्तिगत संतुष्टि को लेकर सोच बढ़ जाती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आज की महिलाएं पहले की तुलना में ज्यादा शिक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं. इसलिए अगर कोई रिश्ता लगातार तनाव, अपमान या मानसिक परेशानी का कारण बन रहा हो, तो वो पहले की तरह मजबूरी में उसे निभाने के बजाय अपने भविष्य को लेकर स्वतंत्र फैसला लेने का साहस दिखा सकती हैं. एक्सपर्ट्स ये भी साफ करते हैं कि मेनोपॉज का मतलब हर महिला के लिए रिश्ता टूटना नहीं होता. अगर पति-पत्नी के बीच भरोसा, सम्मान, प्यार और खुला संवाद हो, तो इस दौर को आसानी से पार किया जा सकता है. कई कपल इस समय एक-दूसरे को इमोशनल सपोर्ट करके अपने रिश्ते को और मजबूत भी बनाते हैं.
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कैसे संभालें ये दौर?
-पति-पत्नी खुलकर अपनी भावनाओं पर बात करें.
-मेनोपॉज से जुड़े बदलावों को समझने की कोशिश करें.
-जरूरत महसूस होने पर डॉक्टर या रिलेशनशिप काउंसलर की मदद लें.
-मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.
-एक-दूसरे को समय और भावनात्मक सहयोग दें.
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