Parenting Mistakes: सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश रहे, हंसता-खेलता रहे और जीवन में बहुत आगे जाए. इसके लिए वह उसे हर सुविधा मुहैया करवाने की भी कोशिश करे हैं. लेकिन, अक्सर ही जाने-अनजाने माता-पिता कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिनसे बच्चे के मन को ठेस लगती है, बच्चा अपना कोंफिडेंस खो देता है और उसमें हीन-भावना आने लगती है. इन्हीं में से एक बड़ी गलती है बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करना. बच्चे को यह कहना कि वह दूसरे बच्चों जैसा क्यों नहीं है या उसमें कोई कमी है, बच्चे के लिए खामोश जहर जैसा साबित होता है. इसी कारण बच्चे अक्सर ही घुट-घुटकर रहने लगते हैं. यहां जानिए बच्चे की तुलना (Comparison) दूसरे बच्चे से करने पर बच्चे के मन-मस्तिष्क या कहें जीवन पर क्या असर पड़ता है.

बच्चे की तुलना दूसरों से करने पर क्या होता है

बढ़ती है हीन भावना

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बच्चे की तुलना अगर बार-बार दूसरे बच्चे से की जाए और कहा जाए कि देखो वह कितना होशियार है या तुमसे ज्यादा अच्छा नाचता-गाता है या किसी खेल में तुम उसके सामने कुछ भी नहीं हो, बच्चे में हीन भावना डालने लगता है. इससे बच्चों में चिड़ की भावना आती है और बच्चों का सेल्फ कोंफिडेंस खत्म (Low Self Confidence) होने लगता है सो अलग.

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ईर्ष्या बढ़ती है

दूसरे बच्चों से आयदिन तुलना किए जाने पर बच्चे में ईर्ष्या और जलन की भावना घर करने लगती है. बच्चा दूसरे बच्चों को अपना दुश्मन मानने लगता है और दूरियां बढ़ाने लगता है. वह अपने ही दोस्तों के साथ खेलना-कूदना या उनसे बात करना बंद कर देता है.

माता-पिता से बढ़ जाती हैं दूरियां

आप अगर बच्चे को मजाक में भी किसी से कमतर दिखाते हैं या उसकी तुलना किसी दूसरे से करते हैं तो बच्चा आपसे दूर होने लगता है. आपको एहसास नहीं होता लेकिन बच्चे को आप अच्छे लगना बंद हो जाते हैं और उसे लगता है कि आप अब उससे प्यार नहीं करते हैं. इससे बच्चे का मन अंदर ही अंदर कचोटने लगता है.

बच्चे को होता है तनाव

बच्चे की सेहत अच्छी रहे इसके लिए उसे अच्छा माहौल देना भी जरूरी होता है. ऐसे में बच्चे की तुलना जब किसी और से की जाती है तो उसे तनाव होने लगता है, उसे एंजाइटी हो सकती है और मानसिक दबाव महसूस होता है.

बच्चा उदास रहने लगता

बच्चे की बार-बार तुलना से उसे ऐसा लगता है जैसे अब उसके लिए कुछ बचा ही नहीं है. वह उदास (Sad) रहने लगता है और उसकी सीखने की क्षमता कम होने लगती है. बच्चे की यह उदासी जाने का नाम नहीं लेती है और कम उम्र से ही वह बाकी बच्चों से खुद को अलग और अकेला पाता है.

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