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हर समय ऑनलाइन रहने से कहीं आपको भी तो नहीं हो गया है ब्रेन रॉट? जानिए Brain Rot के लक्षण कैसे दिखते हैं

What Is Brain Rot: आपने इंटरनेट पर ब्रेन रॉट शब्द के बारे में जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर ब्रेन रॉट क्या होता है और कैसे पता चलता है कि किसी को ब्रेन रॉट हो गया है? इस लेख में आपको मिलेगा आपके हर सवाल का जवाब.

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Brain Rot Meaning In Hindi: यहां जानिए क्या है ब्रेन रॉट और कैसे दिखते हैं इसके लक्षण.

Brain Rot Symptoms: इंटरनेट पर ब्रेन रॉट शब्द काफी पॉपुलर है और कई बार मजाक में व्यक्ति खुद के लिए इस शब्द का इस्तेमाल कर लेता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ब्रेन रॉट क्या होता है? ब्रेन रॉट का शाब्दिक अर्थ (Brain Rot Meaning) है दिमाग का सड़ जाना लेकिन सचमुच दिमाग के सड़ जाने को ब्रेन रॉट नहीं कहते हैं बल्कि यह एक कंडीशन है जिसमें व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगती है और उसका अटेंशन स्पैन भी कम होने लगता है. हर समय सोशल मीडिया यूज करने वाले लोगों में ज्यादातर ब्रेन रॉट देखने को मिलता है. अगर आप भी अपने फोन के बिना 1 मिनट भी नहीं रह पाते हैं तो हो सकता है आपको भी ब्रेन रॉट हो गया है. यहां जानिए ब्रेन रॉट होने पर कैसे लक्षण नजर आने लगते हैं.

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ब्रेन रॉट होने के लक्षण कैसे दिखते हैं

  • आपकी नींद पूरी तरह नहीं खुलती उससे पहली ही आप फोन चलाना शुरू कर देते हैं
  • आप अब लंबे आर्टिकल्स या कहानियां नहीं पढ़ पाते हैं
  • आप हर वीडियो को 2X स्पीड में देखते हैं
  • किसी भी फिल्म को अपना फोन चेक किए बिना नहीं देख पाते हैं
  • जब आप बोर होते हैं तो सबसे पहले अपना फोन उठाते हैं
  • शॉर्ट वीडियोज देखने के अलावा आपको अब कुछ अच्छा नहीं लगता है
  • आप बिना फोन देखे खाना नहीं खा पाते हैं
  • आप बिना डिस्ट्रैक्ट हुए किसी से बात नहीं कर पाते हैं
  • मोटिवेशन की कमी हो जाती है
  • कुछ भी सोचने-समझने में दिक्कत होने लगती है
  • आप चीजें भूलने लगते हैं और ब्रेन फॉग (Brain Fog) होने लगता है
  • मूड हमेशा ही खराब रहता है और एंजाइटी या इरिटेशन हो सकती है
  • क्रिएटिविटी में कमी आने लगती है.

ब्रेन रॉट किन-किन कारणों से होता है

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एक्सेसिव स्क्रीन टाइम – हर समय फोन या लैपटॉप में लगे रहने से और सोशल मीडिया पर ऑनलाइन रहने से ब्रेन रॉट हो सकता है. इसमें दिमाग को एकसाथ इतनी इंफोर्मेशन मिल जाती है कि व्यक्ति का अटेंशन स्पैन और मेमोरी कम होने लगते हैं.

खराब नींद – अगर आपकी स्लीप क्वालिटी अच्छी नहीं होगी तो इससे ब्रेन रॉट होने लगता है. इससे दिमाग की सेहत भी बिगड़ती है.

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हर समय तनाव लेना – जिन लोगों को क्रोनिक स्ट्रेस होता है वे मेंटली एग्जॉस्ट हो जाते हैं और उनकी निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगती है.

फिजिकल एक्टिविटी की कमी – ब्रेन रॉट होने का एक कारण यह भी है कि व्यक्ति फिजिकली एक्टिव नहीं होता है. इस इनएक्टिविटी के कारण सोचने की क्षमता भी प्रभावित होती है और एनर्जी कम रहने लगती है सो अलग.

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मेंटल ओवरलोड – अगर दिमाग को आराम दिए बिना मल्टीटास्क किए जाएं तो इससे दिमाग थकने लगता है और ठीक तरह से काम नहीं कर पाता है.

खराब डाइट – खानपान अच्छा ना हो तो इससे भी दिमाग के काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है.

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ब्रेन रॉट होने से कैसे बचें

  • अपनी नींद की क्वालिटी को बेहतर करने पर ध्यान दें.
  • खानपान को अच्छा रखें और फल, सब्जियां, प्रोटीन और पानी पर्याप्त मात्रा में लें.
  • डिजीटल ओवरलोड को कम करने की कोशिश करें. हर 60 से 90 मिनट में फोन चलाने से ब्रेक लें.
  • अपने शरीर को रोजाना हिलाएं-डुलाएं. इसके लिए योगा, एक्सराइज या वॉक वगैरह करें.
  • मेंटल रेस्ट के लिए डीप ब्रीदिंग या मेडिटेशन करें.
  • एकसाथ अपने ऊपर बहुत ज्यादा काम ना लें बल्कि ब्रेक्स लेते रहें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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