Parenting: बॉलीवुड के चॉक्लेट बॉय आर माधवन (R Madhavan) के बेटे वेदांत माधवन (Vedaant Madhavan) 2026 एशियन गेम्स में 12 मेंबर्स की स्विमिंग टीम को टू टाइम ओलंपियन श्रीहरि नटराज और साजन प्रकाश के साथ लीड करने वाले हैं. वेदांत माधवन उन सेलेब्रिटी किड्स की गिनती में आते हैं जिन्होंने अपनी पहचान एक्टिंग से अलग किसी करियर में बनाई है. अपने बेटे की परवरिश और वेदांत के लाइफस्टाइल के बारे में हाल ही में माधवन ने एक इंटरव्यू में कुछ इनसाइट्स दिए हैं. माधवन ने द हिंदू से बातचीत में बताया कि उनके लिए एक सेलेब्रिटी फादर होना कैसा है और किस तरह उन्होंने अपने बेटे की परवरिश की है.
यह भी पढ़ें - चिल्लाने पर ही क्यों बात सुनता है बच्चा? चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट ने कहा यह एक गलती हो सकती है वजह
---विज्ञापन---
माधवन ने बेटे से कही यह बात
वेदांत के एक सेलेब्रिटी किड होने के चलते आर माधवन ने उन्हें हमेशा ग्राउंडेड रखने की कोशिश की है. माधवन ने बताया, "मैं एक सेलेब्रिटी हूं और वह एक सेलेब्रिटी चाइल्ड है. उसने अपनी भी ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिसने उसे मशहूर बनाया है, और यह इस तथ्य के साथ और बढ़ जाता है कि वह मेरा बेटा है. ज्यादातर, मैं उसे यह बताता हूं कि उसके पास एक आम बच्चे से ज्यादा मौके हैं क्योंकि लोग उसके बारे में जानते हैं, और वह अगर अपनी चीजों को ढंग से संभालना नहीं जानता है तो बहुत जल्दी चर्चा का विषय बन सकता है."
अपने बेटे को ग्राउंडेड रखने को लेकर माधवान कहते हैं, "मैं उसे याद दिलाता रहता हूं कि यह दूसरों की वजह से मिली शोहरत है. कभी-कभी आपको उस अटेंशन की आदत हो जाती है. कई बार उसके साथ सेलेब्रिटी जैसा बर्ताव किया जाता है. मैंने कहा कि यह सब बहुत कम समय के लिए ही होगा. कभी-कभी व्यक्ति उस अटेंशन को वापस पाने के लिए बेवकूफी कर बैठता है.
---विज्ञापन---
बेटे को अत्यधिक सुविधाएं मिलना भी चैलेंजिंग रहा
माधवन ने अपने पिता बनने के सफर के बारे में भी बताया और कहा कि पिता के तौर पर वे हर माता-पिता की तरह ही घबराते हैं और उनसे भी गलतियां हो सकती हैं. उन्होंने कहा, "हम हमेशा अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं. ऐसा करने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करते हैं. लेकिन, हम यह भी जानना चाहते हैं कि कहां रुकना है. पेरेंटिंग कहां खत्म होती है और प्रिविलेज कहां शुरू होती है. मेरे लिए हर बार उस बारीक फर्क को समझना जरूरी होता है. कभी-कभी यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है. क्या मैं उसे उस सुविधा का फायदा उठाने दूं या उसे खुद जाकर अपने मेडल जीतने दूं. अगर मैं उस पर ज्यादा जोर डाल रहा हूं तो क्या मैं उसे खतरे में डाल रहा हूं या मैं वो कर रहा हूं जो असल में सही काम है. तो यह सवाल और डाउट्स यही पेरेंट होने का हिस्सा हैं."
---विज्ञापन---
हमेशा से बेटे को अडल्ट की तरह किया ट्रीट
बेटे को अडल्ट की तरह ट्रीट करने को लेकर माधवन बताते हैं, "वह 20 साल का है इसलिए अब लगभग एक वयस्क ही है. जब वह 5 साल का था तभी से मैंने उसके साथ एक वयस्क जैसा व्यवहार किया है. वह बच्चों की जिद या नखरे नहीं करता था. हम उससे उसकी राय पूछते थे और फिर उसे बताते थे कि हम उसका सुझाव क्यों नहीं मान रहे हैं. वह बात समझ जाता था.
---विज्ञापन---
कैसा है बेटे का लाइफस्टाइल
माधवन ने बताया कि बेटे वेदांत का लाइफस्टाइल नियमानुसार चलता है. वेदांत एक स्पोर्ट्सपर्सन हैं और इसीलिए रात में 8 बजे सो जाते हैं और सुबह 4 बजे उठते हैं. माधवन कहते हैं, "वह अभी भी देश के लिए स्विमिंग कर रहा है. देश के पास उससे बेहतर कई तैराक हैं जिन्हें ज्यादा अटेंशन देने की जरूरत है और हम पूरी केोशिश करह रहे हैं कि देखें ऐसा कैसे हो सकता है."
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें - बिना डांटे बच्चे को कराएं पढ़ाई, यहां जानिए बच्चों को पढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है