Patanjali Gurukulam: प्राचीन शिक्षा प्रणाली की बात की जाए तो भारतीय दर्शन और नीतिशास्त्र केवल किताबों तक ही सीमित नहीं थे बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और समग्र विकास में उन्हें जीवन में उतारा जाता था. इसी ज्ञान को बच्चों के नैतिक उत्थान और चरित्र को निखारने के क्षेत्र में विशेष भूमिका निभा रहा है पतंजलि गुरुकुलम. पंच महायज्ञ, यम और नियम के आधार पर पतंजलि गुरुकुलम बच्चों में समाज, प्रकृति और पुर्वजों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना पैदा करता है और साथ ही योग दर्शन के अहिंसा और सत्य जैसे सिद्धांतों को बच्चों के जीवन का हिस्सा बनाता है. यहां जानिए भारतीय दर्शन और नीतिशास्त्र विद्यार्थियों के लिए क्यों जरूरी हैं और किस तरह यह बच्चों के समग्र विकास में मददगार हैं.
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विद्यार्थियों को सिखाया जाता है विद्या का वास्तविक अर्थ
गुरुकुल शिक्षा पद्धति में बच्चों को शिक्षा का वास्तविक अर्थ सिखाया जाता है. भारतीय दर्शन के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल जीविका कमाना ही नहीं है बल्कि शिक्षा को बंधनों से मुक्ति दिलाने वाले स्त्रोत के रूप में देखा जाता है. विद्यार्थियों को संकीर्ण सोच से मुक्त कराने की कोशिश की जाती है और कोशिश की जाती है कि बच्चों का दृष्टिकोण बढ़े.
विद्यार्थियों को आध्यतमिकता और रिएलिटी में संतुलन सिखाया जाता है. बाहरी सफलता और आंतरिक शांति दोनों के गुण विद्यार्थियों को समझाने और सिखाने पर जोर दिया जाता है.
मूल्य आधारित शिक्षा के अंतर्गत स्कूली शिक्षा में में विद्यार्थियों को धर्म और अर्थ का महत्व बताया जाता है. इससे छात्र अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होते हैं. इसके साथ ही, समावेशी यानी इन्क्लुजिव और वैश्विक सोच की अवधारणा पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को वसुधैव कुटुंबकम् का महत्व सिखाया जाता है.
नैतिक मूल्यों से विद्यार्थियों को अवगत कराने के लिए पाठ्यक्रम में नैतिक मूल्यों पर आधारित कहानियों को शामिल किया जाता है, योग और ध्यान के माध्यम से मानसिक एकाग्रता और तनाव प्रबंधन किया जाता है और पर्यावरण के महत्व को विज्ञान से जोड़ते हए विद्यार्थियों को प्रकृति का महत्व सिखाया जाता है.
ऋषि संस्कृति और कृषि संस्कृति का मेल
पतंजलि गुरुकुलम और आचार्यकुलम ऐसे संस्थान हैं जहां शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को उनकी जड़ों सो जोड़ना है. ऋषि संस्कृति सिखाती है कि पूरी सृष्टि में एक ही चेतना है और कृषि संस्कृति इस चेतना को धरती की उर्वरता और अन्न में देखती है. बच्चों को गो संस्कृति के महत्व से परिचित कराया जाता है. गुरुकुल और आश्रम व्यवस्था में विद्यार्थी गायों की सेवा और खेती भी करते हैं. विद्यार्थियों में बौद्धिक श्रेष्ठता के साथ ही श्रम की गरिमा के विकास का गुण सिखलाया जाता है. आज की आधुनिक शिक्षा तंत्र में इसी संतुलन की कमी महसूस की जाती है और इस कमी को पूरा कर रहा है पतंजलि गुरुकुलम.
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