Parenting: बेटियों के लिए उनके पिता उनके हीरो होते हैं. बेटियां अक्सर कहती भी हैं कि बड़े होने के बाद शादी भी ऐसे ही व्यक्ति से करेंगी जो बिल्कुल उनके पिता जैसा हो. पिता (Father) के लिए बिटिया सबसे खास होती है तभी तो चुटकी लेते हुए लड़कियों को अक्सर पापा की परी कह दिया जाता है. लेकिन, 13 साल की उम्र में बेटियों (Daughters) के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं और भावनात्मक रूप से भी काफी कुछ बदल जाता है. ऐसे में पैरेंटिंग एक्सपर्ट ने बताया है बेटी 13 साल की हो इससे पहले पिता को 5 बातें जरूर सीख लेनी चाहिए. माओनड्यूटी नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से इस पोस्ट को शेयर किया गया है. आप भी जानिए बेटी के पिता को उसके किशोरावस्था में आने से पहले कौन सी बातें पता होनी चाहिए.

बेटी के 13 साल का होने से पहले सीख लें ये चीजें

पहली सीख - आपको ऐसा पुरुष (Male) बनना है जो बेटी की बॉडी पर कमेंट ना करे. वह बहुत मोटी है या बहुत ज्यादा पतली है जैसी बातें आपको नहीं कहनी हैं. इससे बेटी के आत्मविश्वास को ठेस लगती है.

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दूसरी सीख - ऐसे पुरुष बनें जो अपनी बेटी के साथ चलें ना कि उसके आगे. आपको अपनी बेटी के जहन में ऐसी बातें नहीं डालनी है कि वह किसी से भी कमतर है या आप उसके साथ नहीं हैं.

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तीसरी सीख - ऐसे पुरुष बनें जो बेटी को जोर से बोलने या हंसने के लिए शर्मिंदा ना करें. आपको अपनी बेटी के लिए एक सेफ स्पेस बनाना है.

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चौथी सीख - आपको ऐसा पुरुष बनना है जो दूसरे पुरुषों को महिलाओं को गलत बोलने या अपमानित करने से रोकें.

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पांचवी सीख - ऐसे पुरुष बनें जो अपनी बेटी के ओपिनयन (Opinion) की कद्र करें. ऐसे पिता ना बनें जो बेटी के विचारों को ना सुनते हों या उनका सम्मान ना करते हों.

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इन बातों का भी रखें ध्यान

  • बेटी बड़ी होने लगती है तो पिता को भी उसके दोस्त की भूमिका में आना चाहिए. बेटी से प्यार से दोस्त की तरह बात करना भी जरूरी है. कम्यूनिकेशन को कमजोर ना पड़ने दें.
  • सुनने की भी आदत डालें. बेटी की बात बैठकर सुन लेने भर से ही उसका मन हल्का हो जाता है.
  • बेटी को समझाएं कि वह जैसी है पूरी है. किसी और के बनाए नियमों पर चलना उसकी जिम्मेदारी नहीं है.
  • सीमाएं तय करें लेकिन सम्मान भी बनाए रखें. बेटी को सही गलत की पहचान करना सिखाएं.
  • अपनी बेटी से भावनात्मक रूप से जुड़े रहें. उसे रोने की आजादी भी दें और आंसुओं के बाद सशक्त होने की सीख भी दें.
  • बेटी को आत्मनिर्भर बनाएं. उसे पैसों की कद्र करना सिखाने के साथ पैसे संभालने और बचाने भी सिखाएं.

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