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हिंदी न्यूज़ / लाइफस्टाइल / हर 4 साल के बाद ही क्यों फरवरी में होते हैं 29 दिन? जानें Leap Year से जुड़ी 5 अनसुनी बातें

हर 4 साल के बाद ही क्यों फरवरी में होते हैं 29 दिन? जानें Leap Year से जुड़ी 5 अनसुनी बातें

Leap Year 2024: 2024 का दूसरा महीना आज खत्म हो जाएगा। हालांकि इस बार फरवरी में एक दिन एक्स्ट्रा जुड़ा है, क्योंकि इस साल लीप ईयर है। लीप ईयर में फरवरी में एक दिन बढ़ जाता है। आज हम आपको लीप ईयर से जुड़े कुछ अनसुने राज का बारे में बताएंगे।

Edited By: Nidhi Jain | Updated: Feb 29, 2024 09:14
Leap Year 2024: जब हर चार साल में एक दिन एक्स्ट्रा जुड़ता है, तो उस साल को लीप ईयर कहते हैं। लीप ईयर हर चार साल में एक बार आता है। लीप ईयर में फरवरी में एक दिन बढ़ जाता है। इसलिए इस बार यानी साल 2024 में 365 की जगह 366 दिन होंगे। इसके अलावा फरवरी में 28 की जगह 29 दिन है। लेकिन हर चार साल बाद ही लीप ईयर क्यों आता है? इसके अलावा फरवरी माह में ही क्यों एक दिन जुड़ता है? कभी जनवरी, मार्च, अप्रैल या फिर अगस्त-नवंबर में भी तो लीप ईयर आ सकता था, लेकिन ऐसा क्यों नहीं होता? अगर आपके भी मन में ये ही सवाल हैं। तो आज हम आपको इन्हीं सभी प्रश्नों के उत्तर देंगे। इसी के साथ लीप ईयर से जुड़े 5 अनसुने राज के बारे में भी बताएंगे। ये भी पढ़ें- लाल..पीली..गुलाबी नहीं सफेद ही क्यों होती है होटल्स में चादर, वजह जान रह जाएंगे हैरान

फरवरी में ही क्यों जुड़ता है एक दिन एक्स्ट्रा?

पृथ्वी को सूरज की परिक्रमा लगाने के लिए पूरे एक साल का समय लगता है, जिसमें सुबह से लेकर रात और ठंड से लेकर गर्मी का मौसम आता है। पृथ्वी को ये पूरी परिक्रमा करने के लिए 365 दिन और 5 घंटे, 48 मिनट और 46 सेकंड का पूरा समय लगता है। वहीं कैलेंडर ईयर में ये समय बढ़कर 365 दिन और 6 घंटे का हो जाता है। इसलिए हर 4 साल में लीप ईयर आता है, ताकी इस अंतर को कम किया जा सकें। लगातार चार सालों तक प्रत्येक वर्ष 6 घंटे जोड़े जाते हैं। वहीं फरवरी में ही एक दिन इसलिए जुड़ता है क्योंकि जूलियन कैलेंडर में फरवरी महीने को आखिरी महीना माना जाता है। इसी वजह से दिसंबर की जगह फरवरी में 28 दिन की जगह 29 दिन होते हैं।

क्या है लीप ईयर से जुड़े रोचक फैक्ट?

1. बता दें कि रोमन डिक्टेटर जूलियस सीजर ने 45 ईसा पूर्व में जूलियन कैलेंडर के लिए लीप डे की स्थापना की थी। हालांकि पहले लीप ईयर 29 फरवरी को नहीं होता था। इसे 24 फरवरी को माना गया था। वहीं जूलियन कैलेंडर में दिसंबर की जगह फरवरी साल का आखिरी महीना हुआ करता था। 2. पहले के समय में चीनी लोग एक परंपरा का पालन करते थे, जिसके मुताबिक वो लोग कैलेंडर में कुछ स्थानों की जगह पूरे एक महीने को जोड़ा करते थे। हालांकि आखिरी बार ऐसा साल 2015 में किया गया था, लेकिन उसके बाद से ऐसा नहीं हुआ। 3. दुनिया में दो लीप ईयर की राजधानियां हैं, जिन्होंने खुद को लीप ईयर की राजधानी घोषित किया है। ये हैं एंथोनी, टेक्सास और एंथोनी, न्यू मैक्सिको। इसलिए हर चार बाद यहां पर भव्य आयोजन किया जाता है। 4. जो बच्चे लीप ईयर के दिन पैदा होते हैं उनका जन्मदिन 28 फरवरी या फिर 1 मार्च को मनाया जाता है। इसके अलावा पहले के समय में उन्हें लीप लिंग और लीप ईयर बच्चे के नाम से जाना जाता था। 5. पहले के समय में लीप ईयर को धूमधाम से मनाया जाता था। इस दिन महिलाएं पुरुषों के प्रति अपने प्यार का इजहार करती थी। लेकिन धीरे-धीरे ये परंपरा खत्म हो गई। ये भी पढ़ें- वो 3 संकेत, जो बताएंगे दोस्त ही आपका प्यार है, कंफ्यूज हैं तो देख लें आजमाकर


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