Hyderabad House History: दिल्ली के अशोक रोड का हैदराबाद हाउस सिर्फ एक सरकारी गेस्ट हाउस (Government Guest House) नहीं है, बल्कि भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा भी है. यहां पर कभी दुनिया के सबसे अमीर इंसान रहा करते थे, जिनका नाम मीर उस्‍मान अली खान था. उन्हें हैदराबाद के आखिरी निजाम के तौर पर जाना जाता है. मीर उस्‍मान अली खान (Mir Osman Ali Khan) का ये शानदार महल आज भी इतना खूबसूरत है कि दुनिया से आने वाला हर इंसान सबसे पहले हैदराबाद हाउस (Hyderabad House) ही पहुंचता है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) का स्वागत भी हैदराबाद हाउस में होगा. इसकी वजह से ये एक बार फिर से सुर्खियों में है. इसलिए हैदराबाद हाउस की कहानी जानना भी जरूरी है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं.

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हैदराबाद हाउस बनने की कहानी क्या है?

बात 1920 के दशक की है, जब भारत ब्रिटिश राज का हिस्सा हुआ करता था. उस समय कई रियासतों के शासकों का दिल्ली आना-जाना हुआ करता था. इसी जरूरत को देखते हुए मीर उस्मान अली खान ने एक भव्य महल बनवाया, जिसे हम हैदराबाद हाउस के नाम से जानते हैं.

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हैदराबाद हाउस को किसने डिजाइन किया?

इस महल को डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस ने किया है. बता दें, लुटियंस वही वास्तुकार थे, जिन्होंने राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट को आकार दिया है. यह महल इतना खूबसूरत है कि आप एक बार देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे.

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हैदराबाद हाउस बनाने में कितनी लागत लगी है?

रिपोर्ट के मुताबिक, 1920 के दशक में इस भव्य इमारत को बनाने पर लगभग 200,000 पाउंड की लागत लगी थी. यह कीमत आज के हिसाब से करोड़ों में है, लेकिन उस वक्त इस भव्य महल को बनाने के लिए निजाम ने दुनिया से बेस्ट सामान मंगवाया था.

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शाही से कूटनीतिक केंद्र तक का सफर

1948 में जब हैदराबाद रियासत का विलय हुआ तो तमाम व्यवस्थाएं बदल गईं और निजाम के निधन के बाद इस दिल्ली महल को सरकार को सौंप दिया गया. 1974 में, इस महस को अधिकारिक रूप से विदेश मंत्रालय को दे दिया. इसके बाद हैदराबाद हाउस को स्टेट गेस्ट हाउस बना दिया.

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हैदराबाद हाउस की खासियत

  • इसे हैदराबाद के आखिरी निजाम मीर उस्मान अली के लिए बनवाया गया था.
  • इसकी बनावट यूनिक आइडेंटिटी से तैयार की गई है.
  • यह महल शाही लुक देता है, जहां पर डाइनिंग हॉल्स, मीटिंग रूम और संगमरमर का खूबसूरत फर्श है.
  • इंडिया गेट और साउथ ब्लॉक के पास होने की वजह से यहां पर मीटिंग करना आसान है.

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