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पानी में डालते ही पता चल जाएगा साबूदाना असली है या नकली? जानिए खरीदते वक्त किन बातों का रखें ध्यान

Fake Sabudana: अगर आपको लगता है कि सफेद दिखने वाला साबूदाना असली होता है तो ऐसा नहीं है, क्योंकि इसमें की गई मिलावट से इसके रंग पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता. आप पानी में डालकर असली और नकली साबूदाने की पहचान कर सकते हैं. 

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भारत में साबूदाना कसावा या टेपियोका नाम के पौधे की जड़ों के स्टार्च से बनाया जाता है. Image Credit- AI

खबर की मुख्य बातें:

  • साबूदाना कसावा या टेपियोका पौधे की जड़ों के स्टार्च से बनाया जाता है, न कि किसी अनाज से.
  • असली साबूदाना चबाने पर स्टार्च छोड़ता है और चिपकने लगता है, जबकि नकली किरकिरा महसूस होता है.
  • अच्छी क्वालिटी वाले साबूदाने का रंग आमतौर पर सफेद होता है. इसलिए पीले, भूरे या काले धब्बे वाले साबूदाने से बचें.

नवरात्रि शुरू हो चुकी हैं और व्रत रखने का सिलसिला भी शुरू हो गया है. 9 दिनों तक मां दुर्गा के लिए रखे जाने वाले व्रत में ज्यादातर महिलाएं फलाहारी खाना खाती हैं. इसमें आलू, साबूदाना या कुट्टू के आटे से तैयार व्यंजन होते हैं. हालांकि, साबूदाने को लोग ज्यादा खाना पसंद करते हैं, क्योंकि व्रत के दौरान इससे खिचड़ी, खीर, वड़ा और कई तरह की स्वादिष्ट डिश बनाई जाती हैं. इसलिए नवरात्रि के मौके पर मार्केट में भी भरपूर मात्रा में साबूदाना मिलने लगता है. ऐसे में सवाल उठता है कि नकली साबूदाने की पहचान कैसे करें? क्या पानी में डालकर या पकाकर असली साबूदाने की पहचान की जा सकती है. आइए जानते हैं साबूदाना खरीदते और इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. 

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साबूदाना क्या होता है और इसे कैसे बनाया जाता है?

साबूदाना एक सफेद, गोल और छोटे मोतियों जैसा दिखता है, जो किसी अनाज से नहीं बनाया जाता है. भारत में साबूदाना कसावा या टेपियोका नाम के पौधे की जड़ों के स्टार्च से बनाया जाता है. साबूदाना बनाने के लिए कसावा पौधे की जड़ों को निकालकर अच्छी तरह धोया जाता है और छिलका हटाया जाता है. फिर छिले हुए कंद को मशीनों में पीसकर पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है. इस पेस्ट से फाइबर और गंदगी को अलग कर स्टार्च निकाला जाता है. इसके बाद, इस स्टार्च को सुखाया जाता है जब तक यह पूरी तरह से सूख न जाए.

इसके अलावा, सूखे स्टार्च को पीसकर पाउडर बनाया जाता है और फिर मशीनों की मदद से इसे 1 मिमी से 7 मिमी तक के छोटे-छोटे गोले तैयार किए जाते हैं. आखिर में पॉलिश करके साबूदाने को पैकेट में रखा जाता है.

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मिलावटी साबूदाने की पहचान कैसे करें? 

असली और मिलावटी साबूदाने की पहचान आप घर पर भी कर सकते हैं. अगर साबूदाने के रंग, बनावट या क्वालिटी से असली और नकली की पहचान कर सकते हैं. इसके अलावा, चबाकर भी देखा जा सकता है, क्योंकि असली साबूदाने को चबाने से स्टार्च निकलेगा और यह चिपकने लगेगा.

क्या पानी में डालकर पता लगा सकते हैं साबूदाना असली है या नकली?

साबूदाने को पानी में डालकर समझा जा सकता है, लेकिन यह टेस्ट इस बात की गारंटी नहीं देता कि साबूदाना असली है या नकली. साबूदाना आमतौर पर कसावा पौधे की जड़ से निकाले गए स्टार्च से बनाया जाता है.

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घर पर कैसे करें टेस्ट? 

  • एक साफ कटोरी में नॉर्मल पानी लें और इसमें थोड़ी मात्रा में साबूदाना डालें. 
  • इसके कुछ देर बाद देखें कि दाने अपना शेप बनाए रखते हैं या नहीं. 
  • अगर पानी में ज्यादा गंदगी, रंग या कोई अजीब चीज नजर आए तो उसमें मिलावट हो सकती है. 

साबूदाना खरीदते वक्त किन बातों का रखें ध्यान 

  • साबूदाना खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग पर ध्यान दें. अच्छी क्वालिटी का साबूदाना आमतौर पर सफेद होता है. अगर साबूदाने में पीले, भूरे या काले धब्बे दिखाई दें तो उसे खरीदने से बचें. 
  • साबूदाना खरीदते वक्त चेक करें कि दाने गंदे तो नहीं है. अगर दाने ज्यादा टूटे हुए या पाउडर जैसे नजर आ रहे हैं तो अच्छी क्वालिटी का साबूदाना खरीदें. खुला हुआ साबूदाना बिल्कुल भी न खरीदें, जिसमें मिलावट हो सकती है. 
  • पैकेट वाला साबूदाना खरीदते समय उसकी लेबलिंग को नजरअंदाज न करें. पैकेट के लेबल पर एक्सपायरी या बेस्ट बिफोर डेट, फूड लाइसेंस की जानकारी और क्वालिटी को जरूर चेक करें.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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