बच्चे के लिए कौन-सी पानी की बोतल है सबसे सुरक्षित? खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

Water Bottle For Kids: बच्चे के लिए किस तरह की पानी की बोतल चुननी चाहिए जिससे बच्चे की सेहत भी खराब ना हो और बच्चा उसे मैनेज कर सके, जानिए यहां.

Water bottle

बच्चे के लिए कैसे चुनें सही वॉटर बॉटल.

How To Water Bottle: अक्सर बच्चों के स्कूल खुलते ही ज्यादातर माता-पिता नया स्कूल बैग, टिफिन और पानी की बोतल खरीदते हैं. लेकिन अक्सर माता -पिता ध्यान नहीं देते कि किस तरह की पानी की बोतल बच्चों की सेहत के लिए अच्छी रहती है. अक्सर बोतल चुनते समय उसके रंग, डिजाइन और कीमत पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है मगर बोतल का मटीरियल बहुत मायने रखता है. आजकल बाजार में स्टील, कांच, कॉपर और प्लास्टिक जैसी कई तरह की बोतलें मिलती हैं. हर बोतल के अपने फायदे और नुकसान होते हैं. इसलिए बोतल के इस्तेमाल और अपनी जरूरत के हिसाब से ही बोतल का चयन करना चाहिए. आइए जानते हैं किस तरह की बोतल बच्चों के लिए बेहतर मानी जाती है.

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बच्चे के लिए कैसी पानी की बोतल लें

बोतल लेते समय सिर्फ इस चीज पर ध्यान न दें कि कौन सी बोतल दिखने में बहुत अट्रैक्टिव है. बल्कि इस बात पर ध्यान दें कि बोतल का मटीरियल किस चीज का है, उसमें कितना वजन है और वो कितने दिन तक चल पाएगी. ऐसी बोतल लें जिसे साफ करना आसान हो, उसकी बनावट ऐसी हो कि उसे अच्छे से साफ किया जा सके. अगर आपका बच्चा छोटी उम्र का है तो उसके लिए हल्की बोतल ही लें ताकि उसे बोतल ले जाने में आसानी हो.

स्टेनलेस स्टील

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स्टेनलेस स्टील की बोतल बच्चों के लिए अच्छा ऑप्शन है. स्टील की बोतल को क्लीन करना भी आसान होता है. क्लीन करने के बाद लंबे समय तक बोतल मे गंदगी या बदबू भी आसानी से नहीं आती. स्टील की बोतल काफी मजबूत होती है इसलिए ये लंबे समय तक चलती है. इसके मजबूत होने के कारण इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है. बच्चों से इस बोतल का टूटने का डर भी बहुत कम होता है. ज्यादातर बच्चों के लिए स्टील की बोतल एक अच्छा विकल्प माना जाता है. बस समय-समय पर इसे साफ करते रहें.

प्लास्टिक की बोतल

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प्लास्टिक की बोतल काफी हल्की और सस्ती होती है. ये हर जगह आसानी से मिल जाती है. इसके साथ ही इसे स्कूल बैग में ले जाना भी आसान होता है. लेकिन, फिर भी डॉक्टर इसके इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हैं क्योंकि इसेक अंदर मौजूद केमिकल्स जैसे BPA बोतल को धूप या गर्म जगह पर रखने से पानी के अंदर ही मिल जाते हैं. ये केमिकल्स बच्चों के हॉर्मोन्स के साथ छेड़-छाड़ कर सकते हैं और कई बीमारियां पैदा कर सकते हैं. अगर आपको प्लास्टिक की बोतल लेनी भी है तो अच्छी क्वालिटी के प्लास्टिक की बोतल लें जो कि BPA-free हो. बहुत पुरानी, टूटी या फिर गंदी पानी की बोतल फेंक दें.

कॉपर की बोतल

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आजकल कई लोग अपने अच्छे स्वास्थ के लिए कॉपर की बोतल का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, बच्चों के लिए इस बोतल का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए. ये जानना बहुत जरूरी है. डॉक्टर के अनुसार अगर कॉपर की बोतल में गर्म पानी , नींबू पानी या जूस रखा जाए तो कॉपर बोतल से निकलकर पानी में मिलने लगता है. कॉपर मिला हुआ ये पानी पीने से बच्चों को पेट दर्द और उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कॉपर की बोतल को समय-समय पर साफ करने की भी जरूरत पड़ती है.

कांच की बोतल

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कांच की बोतल भी काफी अच्छा विकल्प है इसमें से किसी भी तरह का केमिकल नहीं निकलता है. कांच की बोतल में लंबे समय तक पानी का स्वाद भी नहीं बदलता है. लेकिन, इसमें एक ही दिक्कत होती है कि ये आसानी से टूट सकती है. छोटे बच्चों के लिए यह एक अच्छा ऑप्शन नहीं है लेकिन अगर आपका बच्चा बड़ा है और बोतल का ख्याल खुद रख सकता है तो यह अच्छा विकल्प है.

तो आखिर बच्चे के लिए कौन सी बोतल चुनें

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रोजाना स्कूल ले जाने के लिए आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है स्टेनलैस स्टील. अगर आपको कुछ हल्का ऑप्शन चाहिए तो आप अपने बच्चों के लिए BPA-free प्लास्टिक बोतल भी चुन सकते हैं. अगर आपका बच्चा छोटा है तो उसके लिए ज्यादा भारी बोतल न लें.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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