नॉन स्टिक पैन को कितने दिन में बदल देना चाहिए? जानिए क्या किचन यूटेनसिल्स की भी होती है एक्सपायरी डेट

kitchen Utensils Expiry: रसोई के बर्तनों को अक्सर ही सालों तक इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, क्या नॉन स्टिक बर्तनों में भी लंबे समय तक खाना बनाया जा सकता है? आइए जानते हैं किस बर्तन को कब बदल देना चाहिए.

Kitchen Utensils Expiry Date Non stick pan

कितने दिन में बदल देने चाहिए रसोई के बर्तन, जानें यहां. Image Credit - Pexels

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Kitchen Hacks: रसोई में जब कोई नया बर्तन आता है तो उसे तबतक इस्तेमाल किया जाता है जबतक वो बर्तन टूट कर अलग ना हो जाए. बर्तनों की यूं तो कोई एक्सपायरी डेट (Utensils Expiry Date) नहीं होती है, लेकिन बर्तनों को भी बाकी चीजों की ही तरह सही समय पर बदलना जरूरी होता है. सिल्वर या स्टील के बर्तनों की बात फिर भी अलग होती है लेकिन नॉन स्टिक बर्तन अलग होते हैं. नॉन स्टिक बर्तन जब नए होते हैं तो इनका इस्तेमाल करना आसान होता है और बेहद आसानी से ही इनपर कुछ भी पकाया जा सकता है जो चिपकता नहीं है और स्मूद तरीके से पैन से अलग हो जाता है. लेकिन, नॉन स्टिक बर्तनों की कोटिंग हटना शुरू होती है तो इसके सेहत पर नुकसान भी हो सकते हैं. ऐसे में यहां जानिए नॉन स्टिक (Non Stick) समेत अन्य बर्तनों को कबतक इस्तेमाल करना चाहिए और इन बर्तनों को कब हटा देना चाहिए.

नॉन स्टिक बर्तनों को कब बदल देना चाहिए

ज्यादातर नॉन स्टिक बर्तनों में टेफलॉन नामक केमिकल की कोटिंग होती है जिसमें परफ्लुओरोऑक्टेनोइक एसिड (PFOA) होता है जिससे इन बर्तनों को साफ करना आसान हो जाता है और इनपर तेल या मक्खन वगैरह नहीं चिपकता है. कई ब्रांड्स इन बर्तनों पर सेरामिक कोटिंग भी करते हैं. लेकिन, लगातार इस्तेमाल से इन नॉन स्टिक बर्तनों की क्षमता कम होने लगती है जिससे सेहत पर नकारात्मक असर पड़ना शुरु हो जाते हैं. इसीलिए आमतौर पर 1 से 2 सालों में इन बर्तनों को बदलने की सलाह दी जाती है.

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  • जब नॉन स्टिक बर्तन स्क्रैच होने लगे तो उन्हें बदल दें.
  • अगर घर में साल 2015 से पहले लिए गए नॉन स्टिक बर्तन हैं तो इन्हें बदलें क्योंकि इनमें PFOA की मात्रा ज्यादा होगी.
  • अगर बर्तन की शेप बदल गई है तो इसे बदलना जरूरी है.
  • नॉन स्टिक बर्तनों की कोटिंग हटने के बाद इन्हें इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • अगर नॉन स्टिक बर्तन पर खाना चिपकने लगा है तो यह इन बर्तनों को रिप्लेस करने का सही समय है.
  • अगर बर्तन पर जंग दिखने लगा है तो इन बर्तनों को बदल दें.

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बाकी बर्तनों को कब बदलें

  • चाकू या पीलर वगैरह को 1 से 2 साल में बदल देना चाहिए. अगर इनका हैंडल टूट रहा है या फिर ये घिस गए हैं और अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं तो इन्हें बदलें.
  • एल्यूमिनियम बर्तनों को बदलने का सही समय 5 से 7 साल का कहा जाता है. इसके अलावा जब बर्तन टेढ़े हो जाएं तब उन्हें बदलें.
  • स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) के बर्तनों को 10 से 15 साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन, इनमें खाना जलने लगे या फिर जंग दिखे तो तुरंत बदल दें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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