हर बात को ज्यादा सोचने की आदत छोड़ें, इन 5 तरीकों से मिलेगा ओवरथिंकिंग से छुटकारा

How to Stop Overthinking: अगर आप भी हर समय ओवरथिंक करते रहते हैं या कहें हर बात को जरूरत से ज्यादा सोचते हैं तो यह आदत आपको अंदर ही अंदर तकलीफ देने लगती है. ऐसे में यहां जानिए किस तरह ओवरथिंकिंग से बचा जा सकता है.

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यहां जानिए कैसे कम होगी ओवरथिंकिंग की आदत.

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Overthinking: क्या आपका दिमाग भी हर छोटी-बड़ी बात पर घंटों सोचता रहता है? क्या रात को सोने की कोशिश करते हैं लेकिन दिमाग में विचारों का तूफान थमने का नाम नहीं लेता? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. आजकल लाखों लोग ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचने की समस्या से जूझ रहे हैं. यह आदत न सिर्फ मानसिक शांति (Mental Peace) छीन लेती है बल्कि आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी कमजोर करती है. ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर इस ओवरथिंकिंग से बचा जा सकता है.

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ओवरथिंकिंग से कैसे मिलेगा छुटकारा

अपने विचारों को पहचानें

ओवरथिंकिंग से लड़ने का पहला कदम है उसे पहचानना. जब आप किसी बात को बार-बार सोचने लगें तो खुद से पूछें, “क्या यह सोचना अभी जरूरी है? क्या इससे कोई हल निकलेगा?” अगर जवाब ‘ना’ है तो यह संकेत है कि आप ओवरथिंकिंग के जाल में फंस रहे हैं. जब एहसास होने लगे तो इससे निकलने की राह पर चलना भी जरूरी हो जाता है.

वर्तमान में जिएं

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ओवरथिंकिंग अक्सर या तो बीते हुए कल के पछतावे में होती है या आने वाले कल की चिंता में. इसका सबसे कारगर इलाज है वर्तमान पल में ध्यान लगाना. गहरी सांस लें, अपने आस-पास की चीजों को ध्यान से देखें, सुनें और महसूस करें. रोज 5-10 मिनट की माइंडफुलनेस या मेडिटेशन दिमाग को शांत करने में बहुत मदद करता है.

विचारों को लिखें

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जब दिमाग में बहुत सारे विचार एक साथ चलने लगें तो उन्हें डायरी में लिख लें. जर्नलिंग एक बेहतरीन तरीका है जो मन का बोझ हल्का करता है. जब विचार कागज पर उतर जाते हैं तो दिमाग उन्हें बार-बार दोहराना बंद कर देता है. इसके अलावा लिखने से समस्या का हल भी ज्यादा स्पष्ट नजर आता है.

सोचने का अलग समय निकालें

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एक अनोखा लेकिन असरदार तरीका यह है कि दिन में एक निश्चित समय जैसे 15-20 मिनट सिर्फ चिंता करने के लिए रख दें. बाकी समय जब भी कोई नकारात्मक विचार आए तो खुद से कहें कि इसके बारे में मैं अपने वरी टाइम में सोचूंगा. इससे धीरे-धीरे चिंता करने की आदत कम होने लगती है.

एक्टिव रहने की कोशिश करें

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व्यायाम सिर्फ शरीर के लिए नहीं दिमाग के लिए भी जरूरी है. जब आप दौड़ते हैं, योगा करते हैं या बस तेज चाल से टहलते हैं तो शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन निकलता है जो मूड बेहतर करता है और चिंता कम करता है. रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि ओवरथिंकिंग को काफी हद तक कम कर सकती है.

ओवरथिंकिंग एक आदत है और हर आदत बदली जा सकती है. याद रखें कि जिंदगी की हर समस्या का हल ज्यादा सोचने से नहीं, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने से मिलता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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