लेखिका और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति तथा न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने हाल ही में वोग इंडिया के लिए एक वीडियो में हेल्दी लाइफस्टाइल और भोजन पर चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने हेल्दी खाने की आदतों, अपने पसंदीदा भोजन और किन चीजों को अपनी डाइट से दूर रखना चाहिए, इस पर बात की।
यह वीडियो 28 मार्च को यूट्यूब पर पोस्ट किया गया था, जिसमें ‘व्हाट्स (नॉट) ऑन योर प्लेट?’ नामक सेगमेंट में दोनों ने अपनी डाइट और सेहत से जुड़ी अहम बातें बताईं। इस दौरान रुजुता दिवेकर ने ‘घर के खाने’ को प्राथमिकता देने की बात कही, वहीं सुधा मूर्ति ने बताया कि वे ऐसा भोजन खाना पसंद करती हैं जिससे उन्हें खुशी मिले लेकिन वे हाई-कैलोरी वाला खाना अपनी डाइनिंग टेबल से दूर रखती हैं।
80 प्रतिशत भोजन घर का होना चाहिए
रुजुता दिवेकर जो बॉलीवुड सेलेब्रिटी करीना कपूर की न्यूट्रिशनिस्ट भी हैं, उन्होंने बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि हमारे भोजन का 80 प्रतिशत हिस्सा घर के खाने से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें वही खाना चाहिए जिसे हम आसानी से पहचान सकें और जिसका नाम हमें पता हो। ऐसा भोजन जो हजारों मील दूर से आकर हमारी थाली में पहुंचता है या जिसका नाम हमें ठीक से बोलना भी नहीं आता वह सेहत के लिए अच्छा नहीं होता।
उन्होंने बताया कि भारत में पहले से ही खाने में बहुत विविधता है और हमें इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए। हमारे पारंपरिक व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि पोषण से भरपूर भी होते हैं। इसलिए हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और बाहर के फैंसी, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से बचना चाहिए।
सुधा मूर्ति की डाइट रूटीन
सुधा मूर्ति ने भी अपने खान-पान को लेकर अपनाए गए नियमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वे उन चीजों को अपनी डाइनिंग टेबल से दूर रखती हैं जो हाई-कैलोरी वाली होती हैं, जैसे पेड़ा, बर्फी और मैसूर पाक। हालांकि, वे इन चीजों को पूरी तरह से नहीं छोड़तीं बल्कि जब उनका मन करता है तभी थोड़ी मात्रा में खाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम इंसान हैं और हमें कभी-कभी मीठा या तला-भुना खाने का मन होता ही है। लेकिन अगर हम इसे रोजाना खाने लगें तो यह हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए मैं अपनी पसंदीदा लेकिन अनहेल्दी चीजों को नजरों से दूर रखती हूँ।
इसके अलावा सुधा मूर्ति एक सख्त रूटीन फॉलो करती हैं और अपने खाने पर हमेशा ध्यान देती हैं। वे इस बात को लेकर सचेत रहती हैं कि उनकी डाइट संतुलित हो और उसमें बहुत ज्यादा तली-भुनी या मीठी चीजें न हों।
स्वस्थ जीवन के लिए अनुशासन और संतुलन है जरूरी
इस बातचीत के अंत मे सुधा मूर्ति ने कहा हमें यह सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए कि आप हमेशा 16 या 15 साल के नहीं रह सकते, एक दिन आप भी मेरी तरह 75 साल के होंगे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे हमें अपने खान-पान और लाइफस्टाइल को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।